• Home
  • News
  • Torrential rains wreak havoc in Uttarakhand: Extremely heavy rainfall expected over the next 48 hours; 'Orange Alert' issued for five districts. Landslides block highways in the mountains, and rivers are in spate.

उत्तराखण्ड में बारिश का रौद्र रूप: अगले 48 घंटे बेहद भारी, पांच जिलों में ऑरेंज अलर्ट! पहाड़ों पर भूस्खलन से हाईवे बंद, नदियां उफान पर

editor
  • Awaaz Desk
  • July 09, 2026 08:07 AM
Torrential rains wreak havoc in Uttarakhand: Extremely heavy rainfall expected over the next 48 hours; 'Orange Alert' issued for five districts. Landslides block highways in the mountains, and rivers are in spate.

देहरादून। उत्तराखंड में मानसून ने एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण प्रदेश के पर्वतीय और मैदानी दोनों क्षेत्रों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। मौसम विज्ञान केंद्र, देहरादून ने राज्य के पांच जिलों में भारी से बहुत भारी वर्षा का पूर्वानुमान जारी करते हुए ऑरेंज अलर्ट घोषित किया है, जबकि शेष जिलों में भारी बारिश की चेतावनी के साथ येलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने आगामी 14 जुलाई तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना जताई है। बारिश के चलते कई राष्ट्रीय राजमार्ग भूस्खलन और रॉक फॉल की चपेट में आ गए हैं। पहाड़ों से लगातार मलबा और बोल्डर गिरने के कारण यातायात प्रभावित है, जबकि मैदानी जिलों में जलभराव से लोगों की परेशानियां बढ़ गई हैं। प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं।

पांच जिलों में ऑरेंज अलर्ट, बिजली गिरने और भूस्खलन की चेतावनी
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार गुरुवार को देहरादून, हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर, नैनीताल और चंपावत जिलों में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है। इन जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं पौड़ी, टिहरी, उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ जिलों में भारी वर्षा की संभावना को देखते हुए येलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि संवेदनशील इलाकों में मध्यम स्तर के भूस्खलन, चट्टान गिरने, सड़क कटाव, राजमार्ग बाधित होने और बिजली गिरने की घटनाएं हो सकती हैं। लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।

मसूरी में गिरा 100 साल पुराना विशाल पेड़
लगातार बारिश के बीच पहाड़ों की रानी मसूरी में बुधवार को एक बड़ा हादसा टल गया। अपर माल रोड स्थित बेकरी हिल के पास लगभग 100 वर्ष पुराना विशाल खाखसी प्रजाति का पेड़ अचानक भरभराकर सड़क पर गिर पड़ा। पेड़ की चपेट में एक कार और सड़क किनारे खड़ी तीन स्कूटी आ गईं। राहत की बात यह रही कि घटना के समय किसी भी वाहन में कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था, जिससे जनहानि नहीं हुई। पेड़ गिरते ही अपर माल रोड पूरी तरह बंद हो गया और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। घटना की सूचना मिलते ही मसूरी पुलिस, फायर सर्विस और वन विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और संयुक्त अभियान चलाकर पेड़ हटाने का कार्य शुरू किया। कई घंटों की मशक्कत के बाद मार्ग को आंशिक रूप से बहाल किया जा सका।

बदरीनाथ हाईवे रॉक फॉल से बंद
चमोली जिले में फरासू स्लाइड जोन एक बार फिर खतरे का केंद्र बना हुआ है। लगातार हो रही बारिश के कारण पहाड़ी से भारी मात्रा में पत्थर गिर रहे हैं, जिससे बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पूरी तरह बंद हो गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की मशीनें मलबा हटाने में जुटी हैं, लेकिन लगातार हो रहे रॉक फॉल के कारण मार्ग बहाल करने में कठिनाई आ रही है। प्रशासन ने यात्रियों को फिलहाल देवलगढ़-चमधार वैकल्पिक मार्ग का उपयोग करने की सलाह दी है।

उत्तरकाशी में गंगोत्री हाईवे कई स्थानों पर बाधित
उत्तरकाशी जिले में लगातार बारिश के चलते गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग नालूपानी, धरासू घाट और नगुण क्षेत्र में कई स्थानों पर भूस्खलन की चपेट में आ गया। पहाड़ी से भारी मलबा और बोल्डर सड़क पर गिरने से यातायात बाधित हो गया। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य के निर्देश पर प्रशासन और बीआरओ की टीमें तत्काल मौके पर पहुंचीं। जेसीबी मशीनों की मदद से मलबा हटाने का कार्य लगातार जारी है। हालांकि नगुण क्षेत्र में लगातार पत्थर गिरने के कारण दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लगी हुई हैं। प्रशासन ने यात्रियों से मौसम की जानकारी लेकर ही यात्रा करने तथा अत्यधिक सावधानी बरतने की अपील की है।

चंपावत प्रशासन पूरी तरह अलर्ट
लगातार बारिश को देखते हुए चंपावत के जिलाधिकारी मनीष कुमार ने सभी जिला स्तरीय अधिकारियों, उपजिलाधिकारियों और तहसीलदारों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि किसी भी क्षेत्र में भूस्खलन, जलभराव, सड़क अवरुद्ध होने, भवन क्षति या अन्य आपदा की सूचना मिलते ही तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया जाए तथा जिला आपदा नियंत्रण कक्ष को तुरंत अवगत कराया जाए। तहसील स्तर के आपदा नियंत्रण कक्षों को भी चौबीसों घंटे सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

अलकनंदा और मंदाकिनी का जलस्तर बढ़ा
रुद्रप्रयाग जिले में लगातार बारिश के चलते अलकनंदा और मंदाकिनी नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। जिला आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार अलकनंदा नदी का जलस्तर 623.15 मीटर तथा मंदाकिनी नदी का जलस्तर 622.23 मीटर दर्ज किया गया है। हालांकि दोनों नदियां अभी खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं, लेकिन प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। सभी संबंधित विभागों को चौबीसों घंटे निगरानी रखने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। इधर मवाणा घोलतीर क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्र और प्राथमिक विद्यालय में बारिश का पानी घुस गया, जिससे बच्चों और शिक्षकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों ने प्रशासन पर जल निकासी की उचित व्यवस्था न करने का आरोप लगाते हुए कहा कि हर वर्ष बारिश के दौरान यही स्थिति बनती है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया। लोगों ने जल्द प्रभावी कार्रवाई की मांग की है।

मैदानी क्षेत्रों में भी बढ़ी मुश्किलें
बारिश का असर केवल पर्वतीय जिलों तक सीमित नहीं है। हरिद्वार और रुड़की में कई स्थानों पर जलभराव की स्थिति बन गई है। सड़कों पर पानी भरने से यातायात प्रभावित हुआ है और लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 14 जुलाई तक उत्तराखंड के अधिकांश हिस्सों में बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। विभाग ने विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोगों, चारधाम यात्रियों और स्थानीय नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें, नदी-नालों के किनारे न जाएं और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत जिला आपदा नियंत्रण कक्ष या स्थानीय प्रशासन से संपर्क करें। 


संबंधित आलेख: