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उत्तराखण्डः सत्ता के दबाव में सच की आवाज दबाने का आरोप! रुद्रपुर में पत्रकार को हिरासत में लिए जाने पर भड़का आक्रोश

editor
  • Awaaz Desk
  • November 04, 2026 06:11 AM
Uttarakhand: Allegations of suppressing the voice of truth under pressure from those in power! Outrage erupts over the detention of a journalist in Rudrapur.

रुद्रपुर। पत्रकार रूपेश कुमार सिंह के खिलाफ पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज किए जाने और उन्हें हिरासत में लिए जाने के बाद स्थानीय मीडियाकर्मियों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों में भारी रोष देखने को मिल रहा है। पुलिस की इस कार्रवाई को अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला और सच की आवाज दबाने का प्रयास बताते हुए बुधवार को आक्रोशित लोगों ने रुद्रपुर कोतवाली का घेराव किया और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में पत्रकार, कांग्रेस कार्यकर्ता और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि कोतवाली परिसर में एकत्र हो गए। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस प्रशासन पर सत्ता के दबाव में एकतरफा और बदले की भावना से कार्रवाई करने का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सच दिखाने वाले पत्रकारों को बेवजह निशाना बनाकर प्रताड़ित किया जा रहा है। प्रदर्शन के चलते कोतवाली परिसर में माहौल काफी तनावपूर्ण बना रहा और सभी ने पत्रकार को अविलंब रिहा करने तथा दर्ज मुकदमा वापस लेने की मांग की। जानकारी के अनुसार, देर रात क्षेत्र में हुए एक सड़क हादसे के बाद पुलिस ने पत्रकार रूपेश कुमार सिंह को हिरासत में लिया। वहीं, रूपेश का आरोप है कि हादसे के बाद बोलेरो सवार कुछ युवकों ने उनके साथ मारपीट की थी। इसके बावजूद पुलिस ने पीड़ितों की सुनवाई करने के बजाय उल्टे पत्रकार पर ही मुकदमा दर्ज कर उन्हें हिरासत में ले लिया। इस एकतरफा कार्रवाई को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस पूरे प्रकरण को मंगलवार को गांधी पार्क में आयोजित भारतीय जनता पार्टी के कार्यक्रम से भी जोड़कर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मौजूदगी वाले इस कार्यक्रम में कई कुर्सियां खाली पड़ी थीं, जिसकी कवरेज कई मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर की गई थी। ‘आवाज इंडिया’ सहित कई स्थानीय सोशल मीडिया पेजों पर खाली कुर्सियों के वीडियो प्रसारित हुए थे, जिन्हें देर रात फेसबुक और अन्य प्लेटफॉर्म्स से हटा दिया गया। पत्रकार संगठनों का कहना है कि सच्ची पत्रकारिता से असहज होकर इस तरह की दमनात्मक कार्रवाई की जा रही है। पत्रकारों ने चेतावनी दी है कि यदि पत्रकार रूपेश सिंह के खिलाफ दर्ज झूठे मुकदमे वापस नहीं लिए गए और निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो आंदोलन को प्रदेश स्तर पर तेज किया जाएगा।


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