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उत्तराखंड ब्रेकिंग:जल्द लग सकता है उत्तराखंड में नाईट कर्फ़्यू? प्रतिदिन होगी ओमिक्रोन को लेकर होगी एक अहम बैठक

editor
  • Kanchan Verma
  • December 24, 2021 01:12 PM
Uttarakhand Breaking: Night curfew may be felt in Uttarakhand every day, an important meeting will be held regarding Omicron

उत्तरप्रदेश की तर्ज पर उत्तराखंड सरकार भी ओमीक्रोन के बढ़ते खतरे के मद्देनजर राज्यभऱ में नाइट कर्फ्यू के साथ अन्य पाबंदियां लगाने पर विचार कर रही है। राज्य में ओमीक्रोन का मरीज मिलने के बाद मुख्य सचिव डॉ.एसएस संधु की अध्यक्षता में गुरुवार को उच्चस्तरीय बैठक हुई। बैठक में सभी जिलों के डीएम और सीएमओ को संक्रमण से बचाव के उपाय और अस्पतालों में इससे निबटने के लिए इंतजाम दुरस्त करने के निर्देश दिए गए। राज्य सरकार द्वारा ये निर्णय लिया गया कि ओमीक्रोन को लेकर प्रतिदिन एक बैठक होगी और जरूरत पड़ने पर नाइट कर्फ्यू के साथ पाबंदियां लगाई जाएंगीं। इसके साथ ही तय हुआ कि उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण को रोकने और टीकाकरण के लिए घर घर सर्वे किया जाएगा।

 

दिल्ली सहित देशभर में ओमीक्रोन के मरीजों में गंभीर लक्षण नहीं दिखे हैं, लेकिन कोरोना के बढ़ते खतरे को देखते हुए लोगों को बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है। सर गंगाराम अस्पताल के डॉक्टर अतुल कक्कड़ ने सलाह दी कि जिन लोगों ने टीका नहीं लगवाया है, वे जल्द से जल्द टीकाकरण पूरा कराएं। इसके अलावा भी तमाम एहतियात बरतने की जरूरत है।

टीकाकरण के योग्य लोगों को तुरंत खुराक लेनी चाहिए। जिन लोगों को पहली खुराक मिल गई है, उन्हें दूसरी खुराक लेने से नहीं चूकना चाहिए। लोगों को नियमित रूप से मास्क पहनना चाहिए, उचित दूरी बनाए रखनी चाहिए। ऐसे समारोहों से बचना चाहिए जहां से बड़े स्तर पर संक्रमण फैलने की आशंका है।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने जांच और निगरानी बढ़ाने, रात में कर्फ्यू लगाने, बड़ी सभाओं का सख्त नियमन, शादियों और अंतिम संस्कार कार्यक्रमों में लोगों की संख्या कम करने जैसे रणनीतिक निर्णय को लागू करने की सलाह दी। एम्स दिल्ली के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया का कहना है कि ओमीक्रोन बेहद संक्रामक है। इसलिए कोविड उपयुक्त व्यवहार का पालन करना बहुत जरूरी है। लोग मानदंडों का पालन करने में ढिलाई बरत रहे हैं। वर्तमान डेटा से पता चलता है कि टीके प्रभावी हैं और गंभीर बीमारी से सुरक्षा प्रदान करते हैं तथा मौत के खतरे को घटाते हैं। सर गंगाराम अस्पताल के मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर अतुल कक्कड़ कहते हैं कि दिल्ली में जो कोरोना के मरीज आईसीयू या वेंटिलेटर पर हैं, वे ऐसे मरीज हैं, जिन्हें किडनी, लिवर या अन्य दूसरी बीमारियां पहले से थीं।


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