उत्तराखण्डः पिथौरागढ़ के कानड़ी गांव में अवैध सड़क निर्माण का मामला! हाईकोर्ट ने निस्तारित की जनहित याचिका, दिए ये निर्देश
नैनीताल। उत्तराखण्ड हाईकोर्ट ने पिथौरागढ़ के कानड़ी गांव में खनन सामग्री को लाने व ले जाने के लिए पट्टाधारक द्वारा अवैध रूप से सड़क निर्माण करने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट की खण्डपीठ ने जनहित याचिका को निस्तारित करते हुए जुर्माने की धनराशि को पट्टाधारक की फर्म से वसूल करने के आदेश दिए हैं। आज हुई सुनवाई राज्य सरकार की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि पूर्व के आदेश पर सरकार ने एक कमेटी गठित करके पट्टाधारक से रिकवरी के आदेश जारी कर उसकी लीज भी निरस्त कर दी थी। परन्तु इस बीच पट्टाधारक की मृत्यु हो जाने के कारण 14 लाख की रिकवरी नही हो पाई। जिसपर कोर्ट ने इसकी वसूली उसकी फर्म से वसूल करने के आदेश दिए हैं। आपकों बता दें कि पिथौरागढ़ के कानड़ी गांव निवासी नीमा वल्दिया ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि उनके गांव में नदी के किनारे सरकार ने खनन हेतु 2022 में पट्टा लीज पर दिया था। शुरु में पट्टाधारक ने मजदूर लगाकर खनन कार्य किया। बाद में खनन समाग्री को लाने व ले जाने के लिए उसने बिना अनुमति के वहां सड़क निर्माण का कार्य प्रारंभ कर दिया। सड़क निर्माण के दौरान उसके द्वारा 100 से अधिक खैर व साल के पेड़ काट दिए गए। जब ग्राम वासियों ने इसका विरोध किया तो कुछ समय के लिए उसने सड़क निर्माण का कार्य बंद कर दिया। विरोध के शांत होने के बाद उसने फिर से सड़क निर्माण का कार्य प्रारंभ कर दिया। जिला प्रसाशन ने भी उनकी शिकायत पर कोई निर्णय नही लिया। जनहित याचिका में कोर्ट से प्राथर्ना की गई है कि अवैध रूप से बन रही सड़क निर्माण कार्य पर रोक लगाई जाय।