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उत्तराखण्डः देहरादून में सड़क निर्माण के लिए 7 हजार पेड़ों की कटाई का मामला हाईकोर्ट पहुंचा! सरकार से मांगा जवाब

editor
  • Awaaz Desk
  • July 23, 2026 12:07 PM
Uttarakhand: Case regarding the felling of 7,000 trees for road construction in Dehradun reaches the High Court; response sought from the government.

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने देहरादून के यमुना वैली, दून घाटी में आसारोडी.- झाझरा में प्रस्तावित सड़क निर्माण प्रोजेक्ट में लगभग 7 हजार पेडों के कटान से पर्यावरण, वन्यजीवों सहित प्राकृतिक जल स्रोतों पर पड़ने वाले असर को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट की खंडपीठ ने केंद्र सरकार सहित उत्तराखंड सरकार को तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने के साथ ही याचिकाकर्ता को उसका प्रति उत्तर दो सप्ताह में पेश करने को कहा है। मामले की सुनवाई के लिए कोर्ट ने पांच सप्ताह बाद की तिथि नियत की है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ती सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में हुई। मामले के अनुसार देहरादून की समाजसेवी रेनू पाल ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर कहा है कि यमुनावैली, दून घाटी में आशारोडी व झाझरा के बीच गतिमान ग्रीन प्रोजेक्ट के तहत सड़क निर्माण के लिए लगभग 7 हजार पेडों का कटान एनएचएआई के द्वारा किया जाना प्रस्तावित है। याचिका में कहा गया है कि ग्रीन प्रोजेक्ट के तहत गतिमान सड़क निर्माण से पहले उत्तराखंड बायो डायवर्सिटी बोर्ड से कोई अनुमति नही ली गई है। बड़ी संख्या में पेड़ों के कटान से पर्यावरण के साथ ही वन्यजीवों पर इसका विपरीत असर पड़ेगा। क्योंकि इन जंगलों में पक्षियों की 300 से अधिक प्रजातियां पाई जाती है और हाथियों का बफरजोन होने के साथ ही आसन बैराज है। क्षेत्र में हर वर्ष कई देशों से विभिन्न प्रजाति के पक्षी आते हैं। इसके निर्माण से पर्यावरण का संतुलन भी बिगड़ेगा।


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