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उत्तराखण्डः चमोली टनल हादसे ने उजाड़ दी नवविवाहिता की दुनिया! जोरदार धमाके के बाद छाया अंधेरा, पानी-मिट्टी में बहते रहे श्रमिक

editor
  • Awaaz Desk
  • August 14, 2026 01:08 PM
 Uttarakhand: Chamoli tunnel tragedy shatters a newlywed woman's world! Darkness engulfed the scene after a massive blast; workers were swept away amidst the rushing water and debris.

चमोली। उत्तराखंड के चमोली जिले में अलकनंदा नदी पर निर्माणाधीन विष्णुगाड़-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की टेल रेस टनल में गुरुवार शाम हुए भीषण हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। सुरंग के भीतर अचानक हुए धमाके के बाद पानी और भारी मलबे का सैलाब आने से कई श्रमिक इसकी चपेट में आ गए। हादसे में अब तक सात श्रमिकों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि तीन श्रमिक अभी भी सुरंग के भीतर लापता बताए जा रहे हैं। 12 श्रमिक घायल हुए हैं, जिनका विभिन्न अस्पतालों में उपचार चल रहा है। हादसे के बाद शुक्रवार तड़के से ही सुरंग में बड़े स्तर पर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन, पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी और सेना समेत विभिन्न एजेंसियों की टीमें मौके पर जुटी हुई हैं। सुरंग के भीतर फंसे श्रमिकों तक पहुंचने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक गुरुवार शाम करीब पौने सात बजे टनल के भीतर ग्रेविटी पर पैकिंग का काम चल रहा था। इसी दौरान अचानक जोरदार धमाका हुआ। धमाके के बाद सुरंग के अंदर तूफान जैसी आवाज सुनाई दी और देखते ही देखते पानी के साथ भारी मिट्टी और मलबा सुरंग में भरने लगा। हादसे के समय टनल में करीब 28 श्रमिक काम कर रहे थे। अचानक आए सैलाब के कारण वहां अफरा-तफरी मच गई। कई श्रमिकों ने किसी तरह अपनी जान बचाई, जबकि कुछ मलबे और पानी की चपेट में आ गए। हादसे के बाद सुरंग के भीतर अंधेरा छा गया और श्रमिकों के बीच चीख-पुकार मच गई। बताया गया कि परियोजना में काम करने वाले अधिकांश श्रमिक बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं। हादसे के बाद बचाव दलों ने तत्काल अभियान शुरू किया और कई श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाला।

सीएम धामी पहुंचे, घायलों से भी मिले
हादसे की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शुक्रवार को पीपलकोटी पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल का जायजा लिया और खुद टनल के अंदर जाकर राहत एवं बचाव अभियान की स्थिति देखी। मुख्यमंत्री ने टीएचडीसी के अधिकारियों से हादसे की जानकारी ली और सुरंग में चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन की समीक्षा की। इसके बाद सीएम धामी जिला अस्पताल पहुंचे और हादसे में घायल श्रमिकों से मुलाकात कर उनका हाल जाना। उन्होंने चिकित्सकों से घायलों के उपचार की जानकारी भी ली। मुख्यमंत्री ने हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिकों के परिजनों के लिए चार-चार लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की। सरकार की ओर से बचाव कार्य में तेजी लाने और घायलों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।

अचानक तूफान जैसी आवाज आई और बहने लगा मलबा-पानी
हादसे में घायल परियोजना में तैनात मैकेनिकल कर्मचारी सेवक सिंह, निवासी पंजाब, जिला अस्पताल में भर्ती हैं। उन्होंने हादसे की भयावहता बताते हुए कहा कि वह रोज की तरह टनल के अंदर काम कर रहे थे। इसी दौरान अचानक जोरदार धमाका हुआ और इसके बाद टनल के भीतर से तूफान जैसी आवाज आने लगी। उन्होंने बताया कि कुछ ही पल में पानी और मिट्टी का सैलाब तेजी से उनकी ओर बढ़ा। इसी बीच लाइट भी चली गई और सुरंग में अंधेरा छा गया। चीख-पुकार के बीच वह भी पानी और मिट्टी के बहाव में फंस गए। सेवक सिंह के मुताबिक वह करीब एक किलोमीटर तक पानी और मिट्टी के दलदल में बहते चले गए। काफी मशक्कत के बाद जब वह किसी किनारे पर पहुंचे तो आसपास फंसे लोगों को बचने के लिए संघर्ष करते देखा। इस दौरान वह बेहोश हो गए। कुछ देर बाद रेस्क्यू टीम के कर्मचारियों ने उन्हें मलबे से बाहर निकाला। अस्पताल में उपचार के बाद उनकी स्थिति में सुधार बताया जा रहा है।

जेसीबी ऑपरेटर ने कैबिन में रहकर बचाई जान
हादसे में घायल जेसीबी ऑपरेटर चंदन कुमार, निवासी बिहार, भी जिला अस्पताल में भर्ती हैं। उन्होंने बताया कि जिस समय पानी और मलबे का सैलाब आया, उस समय वह जेसीबी की कैबिन में मौजूद थे। अचानक सैलाब आने से मशीन पलट गई। मिट्टी और पानी कैबिन के अंदर भी घुसने लगा, लेकिन वह किसी तरह कैबिन के भीतर खड़े रहे। चंदन के मुताबिक करीब आधे घंटे तक वह बेहद भयावह स्थिति में फंसे रहे। इस दौरान उन्होंने अपने साथियों को मलबे और पानी में बहते देखा। उन्होंने बताया कि मशीन के नीचे भी कुछ लोग फंसे हुए थे और मदद के लिए आवाज लगा रहे थे, लेकिन वह खुद कैबिन में फंसे होने के कारण उनकी मदद नहीं कर पा रहे थे। इसी दौरान उन्हें रेस्क्यू टीम की रोशनी दिखाई दी। चंदन ने इसे जिंदगी की नई उम्मीद बताया। बचाव दल ने मशीन की कैबिन को काटकर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला।घायलों के मुताबिक हादसे के बाद सुरंग के अंदर चारों तरफ अंधेरा, पानी और मलबा था। ऐसे में जब रेस्क्यू टीम सुरंग के भीतर पहुंची तो उनकी रोशनी देखकर फंसे श्रमिकों को बचने की उम्मीद जगी। बताया गया कि बचाव दल कई स्थानों तक पहुंचने के लिए खाली ड्रमों और अन्य साधनों का इस्तेमाल करते हुए आगे बढ़ा। सुरंग के भीतर कठिन परिस्थितियों के बावजूद रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी रहा।

13 अप्रैल को हुई थी शादी, कुछ महीने में उजड़ गई नई जिंदगी
इस हादसे में टिहरी जिले के थौलधार विकासखंड के ग्राम गंवाल निवासी 31 वर्षीय प्रदीप सिंह पंवार की भी मौत हो गई। प्रदीप की मौत की खबर जैसे ही गांव पहुंची, परिवार में कोहराम मच गया। पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। प्रदीप ग्राम गंवाल, पोस्ट ऑफिस काफलपानी, ब्लॉक थौलधार और प्रतापनगर विधानसभा क्षेत्र के रहने वाले थे। उनके परिवार में पिता, भाई, भाभी, पत्नी और छोटा भाई हैं। परिवार के लिए यह हादसा इसलिए भी बेहद दुखद है क्योंकि कुछ समय पहले ही प्रदीप की मां का निधन हुआ था। परिवार अभी मां की मौत के सदमे से पूरी तरह उबर भी नहीं पाया था कि प्रदीप की असमय मौत ने परिजनों को गहरे सदमे में डाल दिया। प्रदीप की शादी इसी वर्ष 13 अप्रैल को हुई थी। शादी के बाद परिवार ने नई जिंदगी और भविष्य को लेकर कई सपने संजोए थे। घर में नई बहू के आने से खुशियों का माहौल था, लेकिन कुछ ही महीनों बाद सुरंग हादसे ने परिवार की खुशियां छीन लीं। प्रदीप की मौत की खबर के बाद उनकी नवविवाहित पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है। जिस घर में कुछ महीने पहले शादी की खुशियां थीं, वहां अब मातम पसरा हुआ है। परिवार और ग्रामीणों के लिए यह हादसा गहरा आघात बनकर सामने आया है।

तीन श्रमिक अब भी लापता, रेस्क्यू पर टिकी उम्मीदें
हादसे के बाद सात शव बरामद हो चुके हैं और तीन श्रमिकों का अब भी पता नहीं चल पाया है। सुरंग के भीतर भारी मलबा और पानी होने के कारण बचाव दल को लगातार मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, सेना, आईटीबीपी, पुलिस और प्रशासन की टीमें संयुक्त रूप से अभियान में जुटी हैं। फिलहाल सभी की नजरें सुरंग के भीतर चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन पर टिकी हैं। लापता श्रमिकों के परिवारों को उम्मीद है कि बचाव दल जल्द से जल्द उनके अपनों तक पहुंच पाएगा। वहीं प्रशासन का कहना है कि बचाव अभियान पूरी गंभीरता और प्राथमिकता के साथ जारी है।

मृतकों की सूची
प्रदीप पंवार पुत्र अवतार सिंह, (31 वर्ष) टिहरी गढ़वाल।
मुकेश सिंह पुत्र प्रेम सिंह, चमोली।
दुर्लभ शर्मा पुत्रभवानी राम शर्मा, उत्तर प्रदेश।
विजय हंसदा पुत्र राम चन्द्र, उत्तर प्रदेश।
जितेन्द्र कुमार पुत्र  राम चन्द्र, उत्तर प्रदेश।
लोकेश्वर पुत्र सोन सिंह पोयम, छत्तीसगढ़।
भुनेश्वर पुत्र सुरेन्द्र कुमार, छत्तीसगढ़।


लापता लोग
लुकास टोपनो पुत्र श्री बॉससा टोपनो, झारखंड।
चेतन पोयाम पुत्र श्री सोनधार पोयाम, छत्तीसगढ़।
देवनाथ पुत्र श्री धनसुराम बघेल, छत्तीसगढ़।


घायलों की सूची
सुनील दीवान पुत्र संतोश दीवान (20) छत्तीसगढ़।
हारबिल गुडिया पुत्र रेजन गुड़िया (27) निवासी तपरा।
निस्तर भिंगरा पुत्र राफेल भिंगरा (24 वर्ष) झारखंड।
विनोद रावना पुत्र तुनिया रावना (46) झारखंड।
दीना बेगरा पुत्र केला बेगरा (26) झारखंड।
खेला राम बिसरा पुत्र मोनसा बिसरा (22 वर्ष)  झारखंड।
सुबेग सिंह पुत्र वीरा सिंह (45) पंजाब।
तिलकराज पुत्र बुद्धीराम, हिमाचल प्रदेश।
चंदन कुमार पुत्र तुलसी सिंह (39) रोहतास, बिहार।
पेन सिंह पुत्र पीला सिंह (33) छत्तीसगढ़।
रोहित पाण्डे पुत्र अवधेश पाण्डे (20) बिहार। इनका उपचार बेस अस्पताल श्रीनगर में चल रहा है।
गोविन्दो मंडाल पुत्र परीक्षित मंडाल, पश्चिम बंगाल। इनका उपचार जिला चिकित्सालय गोपेश्वर में चल रहा है।


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