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उत्तराखण्डः मुख्यमंत्री की विधानसभा में विकास के दावों की खुली पोल! बच्चों का 4 किलोमीटर का जोखिम भरा सफर, न सड़क न नदी पर पुल

editor
  • Awaaz Desk
  • August 16, 2026 09:08 AM
Uttarakhand: Chief Minister's claims of development in the constituency exposed! Children face a perilous 4-kilometer journey—with neither a road nor a bridge over the river.

चंपावत। देश आजादी की 80वीं वर्षगांठ मना रहा है और सरकार गांव-गांव तक सड़क, शिक्षा और बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने के दावे कर रही है। लेकिन मुख्यमंत्री की विधानसभा चंपावत क्षेत्र से सामने आई एक तस्वीर इन दावों से अलग नजर आती है। यहां बूंगादुर्गापीपल तोक के छात्र-छात्राएं आज भी जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं। गांव से ककनई इंटर कॉलेज की दूरी करीब चार किलोमीटर है, लेकिन इस रास्ते पर न तो पक्की सड़क है और न ही नदी पर कोई पुल। बूंगादुर्गापीपल तोक से ककनई इंटर कॉलेज जाने वाले बच्चों को रोजाना पैदल सफर करना पड़ता है। बरसात के दिनों में उनकी मुश्किल कई गुना बढ़ जाती है। बूंगादुर्गापीपल नदी, जो आगे चलकर नंधोर नदी के नाम से जानी जाती है, बारिश के दौरान उफान पर रहती है। नदी पर पुल नहीं होने के कारण छात्र-छात्राओं को स्कूल आने-जाने के दौरान नदी पार करनी पड़ती है। ऐसे में हर दिन बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों की चिंता बनी रहती है। सुबह जब बच्चे स्कूल के लिए घर से निकलते हैं तो माता-पिता के मन में पढ़ाई से ज्यादा उनकी सुरक्षित वापसी की चिंता रहती है। बरसात में नदी का जलस्तर बढ़ने पर स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों को शिक्षा हासिल करने के लिए ऐसी परिस्थितियों से गुजरना पड़ रहा है, जो किसी भी संवेदनशील व्यवस्था के लिए चिंता का विषय होना चाहिए। ग्रामीणों के मुताबिक बूंगादुर्गापीपल तोक से ककनई तक बेहतर सड़क और नदी पर पुल की मांग लंबे समय से की जा रही है। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। ग्रामीणों का कहना है कि मामला मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अपनी विधानसभा क्षेत्र का है। ऐसे में उन्हें उम्मीद है कि सरकार इस गंभीर समस्या को प्राथमिकता के आधार पर हल करेगी। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री से भावुक अपील करते हुए कहा कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उनके बच्चों को ‘स्कूल तक सुरक्षित पहुंचने की आजादी’ दी जाए। ग्रामीणों की मांग है कि बूंगादुर्गापीपल तोक से ककनई इंटर कॉलेज तक पक्के मार्ग का निर्माण कराया जाए और नदी पर बच्चों की सुरक्षित आवाजाही के लिए पैदल पुल अथवा झूला पुल बनाया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा देती है, लेकिन बेटियों को सुरक्षित स्कूल तक पहुंचने का रास्ता उपलब्ध कराना भी उतना ही जरूरी है। उनका कहना है कि जब तक छात्राओं और छात्रों की स्कूल तक पहुंच सुरक्षित नहीं होगी, तब तक शिक्षा के अधिकार और बेटियों की शिक्षा से जुड़े अभियान पूरी तरह सार्थक नहीं हो सकते। आजादी के 80 साल बाद भी अगर स्कूली बच्चों को शिक्षा के लिए उफनती नदी पार करने का जोखिम उठाना पड़े, तो यह सिर्फ एक गांव की समस्या नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की हकीकत पर बड़ा सवाल है। सड़क और पुल जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में बच्चों का भविष्य जोखिम में डालना गंभीर विषय है। अब निगाहें शासन और प्रशासन पर हैं कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विधानसभा क्षेत्र की इस समस्या पर कब संज्ञान लिया जाता है। क्या बूंगादुर्गापीपल तोक के बच्चों को सुरक्षित स्कूल पहुंचने का रास्ता मिलेगा? क्या नदी पर पुल निर्माण की ग्रामीणों की वर्षों पुरानी मांग पूरी होगी?


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