उत्तराखंड व्यंजन विशेष: दिमाग तक सनसनाहट पैदा करने वाला राई का पीला ककड़ी रायता नही खाया तो क्या खाया? विदेशों में भी इस रायते ने मचा रखी है धूम
भारतीय व्यंजन आज विश्व स्तर पर अपने कभी न भूलने वाले जायके के लिए पहचान बना रहे है। ज़्यादातर भारत की पारंपरिक थाली में आपको एक चीज कॉमन मिलेगी,वो है रायता। ये एक ऐसी डिश मानी जाती है जिसके बिना भारतीय भोजन अधूरा लगता है। भारत के अलग अलग राज्यो में विभिन्न प्रकार के रायते आपको मिल जाएंगे लेकिन उत्तराखंड का सनसनाहट पैदा करने वाला रायता आपको शायद ही पूरी दुनिया मे कहीं और मिलेगा।
उत्तराखंड के हर घर मे दिमाग तक सनसनाहट करने वाला रायता बनता है । गढ़वाल में इस रायते को रैलु कहते है वही कुमाऊं में ककड़ी रैता या पीला रैता कहा जाता है।
तो आइये जानते है इस स्पेशल ककड़ी के रायते की रेसिपी।
ककड़ी के इस स्पेशल रायते के लिए हमें दही, खीरा,हरी मिर्च, लाल पिसी हुई मिर्च, धनिया पत्ती, जीरा पाउडर, हल्दी पाउडर, नमक और राई के दाने चाहिए,राई का उपयोग ही इस रायते को बिल्कुल यूनिक बनाता है। ककड़ी को कद्दूकस में घिस कर उसमे पिसी हुई राई और हरी मिर्च डालकर एक से दो घण्टे के लिए रख दें, अब बाकी मसाले मिलाकर उसमे ऊपर से हरा धनिया डालकर किसी भी व्यंजन के साथ परोसे। अगर कुमाऊनी रायते का असली स्वाद लेना है तो, इसको बना के 4 से 5 घंटे के लिए ढक कर रख दें, इसके बाद इसकी सनसनाहट सिर चढ़ती है,मतलब ये कि बनाने के बाद रायता जितना पुराना होता जाएगा, राई उसमें उतना ही ज्यादा असर छोड़ देती है।
राई और हरी मिर्च दोनों ही अपनी प्रकृति में उष्ण हैं तो ठंडी तासीर वाले दही,और ककड़ी के मिलने पर शीतोष्ण का बैलेंस बनाते है। एंटी बैक्टीरियल रायता भी कहा जा सकता है।
उत्तराखंड में ये रायता हर छोटे बड़े मौकों पर बनाया जाता है। अक्सर ये रायता आपको पहाड़ी इलाकों में बने ढाबों में भी हर वक्त तैयार मिलेगा। लोग इस रायते को पकौड़ी के साथ भी खाना पसंद करते है। शादी ब्याह हो या पितृपक्ष, उत्तराखंड में ये रायता हर मौके पर बनता है।इसका स्वाद इतना ज़बरदस्त होता है कि उत्तराखंड में जब भी कहीं फ़ूड फेस्टिवल का आयोजन होता है वहा उत्तराखंड के रायते को खास तवज्जो दी जाती है। अब आप भी ट्राय कीजिये ये सनसनाहट वाला पीला राई का रायता, और कॉमेंट में ज़रूर बताएं कि आपको ये रायता कैसा लगा।