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उत्तराखंड संस्कृति:"चूल्हा न्यूत"!दाल भात और टपकिया उत्तराखंड की संस्कृति को दर्शाता मुख्य भोजन,टपकिया सुना है पहले कभी?

editor
  • Kanchan Verma
  • December 19, 2021 07:12 AM
Uttarakhand Culture: Dal Bhaat and Tapkiya are the main food of Uttarakhand culture, ever heard of tapkiya before?

पहाड़ी व्यंजन इनदिनों भारत ही नही बल्कि विश्वभर में खूब प्रचलित हो रहे है। चाहे मंडुये के केक और बिस्किट हो या भट्ट की चुरकानी, अमेरिका जैसे बड़े देशों में पहाड़ी व्यंजनों को खूब सराहा जा रहा है। उत्तराखंड की संस्कृति  यहां के व्यंजन अपनी वैश्विक पहचान बना रहे है ये हम सब के लिए गौरव की बात है। आज उत्तराखंड के इन व्यंजनों में से हम बात करेंगे दाल भात और टपकिया की। जी हां! टपकिया, ये शब्द उत्तराखंड के लोग तो झट समझ जाएंगे लेकिन जो उत्तराखंड से बाहर का है और यहां की संस्कृति से रूबरू होना चाहता है उसे टपकिया शब्द बेहद पसंद आएगा। दाल भात तो आम  है उत्तराखंड के अलावा भात शब्द उत्तरप्रदेश गुजरात इत्यादि राज्यो में भी चावल के लिए प्रयोग किया जाता है। कई जगह भात खीलों को भी बोलते है,वही खील जो दीवाली में आप बताशो के साथ खरीदते है। दाल भात का मतलब दाल चावल है जो भारत के हर घर मे बनता है,लेकिन उत्तराखंड में ग्रामीणों की संस्कृति को दर्शाने का ये खास भोज्य पदार्थ है जो  टपकिया के साथ परोसा जाता है। अब आप सोचेंगे ये टपकिया क्या है? दरअसल दाल भात, या दोपहर को बनने वाले हर भोजन के साथ जो सब्जी साथ मे परोसी जाती है उसे ही टपकिया कहते है। टपकिया ज़्यादातर हरी सब्जी को कहा जाता है। दिन के खाने में आचार की तरह टपकिया परोसा जाता है,इसका असली स्वाद लेना है तो थाली में बिना कटोरी और बिना चम्मच के दाल भात के साथ टपकिया का आनंद लीजिये। ओहो उंगलियां चाटते रह जाएंगे। उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में दाल भात सिर्फ दोपहर का भोजन ही नही बल्कि नामकरण, जनेऊ संस्कार, शादी ब्याह,बरसी या श्राद्ध पर खासतौर पर बनाया जाता है। दाल भात और टपकिया उत्तराखंड का मुख्य भोजन है। गांव में किसी की शादी हो या नामकरण दाल भात और टपकिया का निमंत्रण देने के लिए लोग घर घर जाया करते है और आवाज़ लगाकर कहते है" चूल्हा न्यूत" है, ये निमंत्रण सपरिवार होता है लेकिन अगर परिवार के किसी एक ही सदस्य को न्यौता देना हो तो आवाज़ लगाकर कहा जाता है "मौ आदिम" को भात निमंत्रण छू।
उत्तराखंड के गांवों में दाल भात और टपकिया बेहद साधारण तरीके से बनाया जाता है सादे मसालों का प्रयोग किया जाता है,हालांकि जैसे जैसे नई पीढ़ियों ने रसोई संभालनी शुरू की है वैसे वैसे अब इस भोजन में प्याज टमाटर इत्यादि का उपयोग बढ़ गया है। दाल भात और टपकिया के साथ मौसम के अनुरूप ही ककड़ी के रायते का भी प्रचलन है। पहाड़ी ककड़ी का रायता अगर आपने चखा है तो कहने की बात ही नही और अगर नही चखा तो एक बार पहाड़ी ककड़ी के रायते का स्वाद ज़रूर लीजिएगा ऐसा रायता आपने न कभी देखा होगा न ही कभी ऐसा स्वाद आपने कभी चखा होगा। पहाड़ी ककड़ी के रायते पर अलग से एक आर्टिकल लिखा गया है जो जल्द ही आपके सामने होगा। तब तक आप दाल भात और टपकिया का आनंद लीजिये।


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