उत्तराखण्डः साइबर ठगी करने वाला आरोपी एसटीएफ के हत्थे चढ़ा! पश्चिम बंगाल से गिरफ्तारी
देहरादून। उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की साइबर क्राइम पुलिस ने 24.95 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए अंतरराज्यीय साइबर गिरोह के एक प्रमुख सदस्य को पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना जिले से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान जियाउर गाजी, निवासी दक्षिण बंकारा, हिंगलगंज, नॉर्थ 24 परगना के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक आरोपी साइबर ठगों को बैंक खाते, एटीएम कार्ड और सिम कार्ड उपलब्ध कराने का काम करता था। एसटीएफ के अनुसार, देहरादून निवासी एक कारोबारी ने साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी कि साइबर ठगों ने उनका मोबाइल फोन हैक कर ई-मेल आईडी और मोबाइल नंबर में बदलाव कर दिया। इसके बाद ठगों ने उनकी कंपनी के बैंक खाते से करीब 24.95 लाख रुपये की रकम निकालकर धोखाधड़ी कर ली। शिकायत के आधार पर पुलिस ने बीएनएस की धारा 318(4), 61(2) और आईटी एक्ट की धारा 66-डी के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान एसटीएफ ने विभिन्न बैंकों, मोबाइल सेवा प्रदाताओं और अन्य संस्थानों से तकनीकी जानकारी जुटाई। बैंक खातों और मोबाइल नंबरों के विश्लेषण के बाद पुलिस टीम पश्चिम बंगाल पहुंची और हाबरा बाजार क्षेत्र से आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि वह साइबर अपराधियों को अपने और अन्य लोगों के बैंक खाते, एटीएम कार्ड और सिम कार्ड उपलब्ध कराता था। इसके बदले उसे आर्थिक लाभ मिलता था। जांच में सामने आया कि आरोपी ने अपने और अन्य लोगों के नाम पर करीब 12 बैंक खाते खुलवाए थे। इसके अलावा ‘गाजी इंटरप्राइजेज’ नाम से फर्जी फर्म बनाकर कई बैंकों में खाते खोले गए थे। साइबर ठगी की रकम इन खातों में आने के बाद चेक और एटीएम के जरिए नकदी निकालकर गिरोह के सदस्यों तक पहुंचाई जाती थी। एसटीएफ के मुताबिक, ठगी की रकम में से 11.95 लाख रुपये पहले आईडीबीआई बैंक खाते में पहुंचे, जिसके बाद रकम को इंडसइंड बैंक और सेंट्रल बैंक के खातों में ट्रांसफर किया गया। इनमें करीब सात लाख रुपये चेक के जरिए और शेष रकम एटीएम से निकाली गई। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से एसबीआई और बैंक ऑफ बड़ौदा के दो डेबिट कार्ड, तीन मोबाइल फोन और अलग-अलग कंपनियों के तीन सिम कार्ड बरामद किए हैं। एसटीएफ अब गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की पहचान करने में जुटी है। मामले में आगे की जांच जारी है।