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उत्तराखण्डः आउटसोर्स कर्मचारियों की नाराजगी बढ़ी! उपनल जैसी सुविधाओं की मांग को लेकर संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने आंदोलन तेज करने की दी चेतावनी

editor
  • Awaaz Desk
  • October 06, 2026 01:10 PM
Uttarakhand: Discontent among outsourced employees rises! The Sanyukt Sangharsh Morcha has threatened to intensify its agitation, demanding benefits similar to those provided by UPNAL.

देहरादून। सरकारी विभागों में लंबे समय से आउटसोर्स के माध्यम से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अब आंदोलन का रास्ता अपना लिया है। संयुक्त संघर्ष मोर्चा आउटसोर्स कर्मचारी संघ ने सरकार और प्रशासन के सामने ‘समान कार्य, समान वेतन’ की मांग उठाते हुए ठेकेदारों के माध्यम से कर्मचारियों के कथित शोषण पर सवाल खड़े किए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि सरकारी विभागों में समान प्रकृति का काम करने के बावजूद उन्हें नियमित या अन्य आउटसोर्स कर्मचारियों के समान सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। संयुक्त संघर्ष मोर्चा का कहना है कि हाल में उपनल कर्मचारियों के लिए जिन सुविधाओं और व्यवस्थाओं की घोषणा की गई है, उसी तर्ज पर आउटसोर्स कर्मचारियों को भी अधिकार और सुविधाएं मिलनी चाहिए। कर्मचारियों का तर्क है कि जब जिम्मेदारियां और काम की प्रकृति समान है तो वेतन और सुविधाओं में इतना अंतर क्यों रखा जा रहा है। आउटसोर्स कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि सरकारी विभागों में कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए लगातार मैनपावर के नाम पर टेंडर प्रक्रिया अपनाई जा रही है। उनका कहना है कि विभागों में नियमित जरूरत के बावजूद कर्मचारियों को सीधे विभागीय व्यवस्था का हिस्सा बनाने के बजाय ठेकेदारों और एजेंसियों के माध्यम से सेवाएं ली जा रही हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि इस व्यवस्था में उनकी नौकरी की सुरक्षा और अधिकार ठेकेदारों पर निर्भर हो जाते हैं। उनका कहना है कि ठेकेदारों की मनमानी के कारण कर्मचारियों को आर्थिक और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है।

हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित विभागों और ठेकेदारों का पक्ष सामने आना अभी बाकी है। आंदोलनरत कर्मचारियों ने सबसे गंभीर आरोप भविष्य निधि यानी पीएफ को लेकर लगाए हैं। उनका कहना है कि पिछले करीब एक वर्ष से कई कर्मचारियों के पीएफ की राशि समय पर जमा नहीं की गई है। कर्मचारियों ने इसे गंभीर आर्थिक अनियमितता बताते हुए पूरे मामले की जांच और पीएफ का स्पष्ट हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि पीएफ जैसी सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी राशि में किसी भी तरह की देरी सीधे उनके भविष्य और आर्थिक सुरक्षा को प्रभावित करती है। ऐसे में संबंधित विभागों को ठेकेदारों और एजेंसियों की कार्यप्रणाली की निगरानी सुनिश्चित करनी चाहिए। संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि जब वे अपनी समस्याएं लेकर संबंधित अधिकारियों के पास पहुंचते हैं तो उन्हें यह कहकर वापस कर दिया जाता है कि वे आउटसोर्स कर्मचारी हैं और उनका नियोक्ता ठेकेदार है। कर्मचारियों का कहना है कि वे सरकारी विभागों में नियमित कर्मचारियों की तरह ही अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। इसके बावजूद समस्याओं के समाधान के समय उन्हें विभाग से अलग कर दिया जाता है। मोर्चे ने इस रवैये को लेकर सरकार से स्पष्ट हस्तक्षेप की मांग की है। संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार और प्रशासन ने उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में समान कार्य के लिए समान वेतन, उपनल कर्मचारियों की तर्ज पर सुविधाएं, पीएफ की लंबित राशि का पूरा हिसाब और ठेकेदारों की कार्यप्रणाली की निगरानी शामिल है।


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