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उत्तराखंड: पूर्व मुख्य सचिव के बेटे पर फर्जी पहचान से करोड़ों की ठगी के आरोप! खुद को IPS और केंद्रीय एजेंसी का अधिकारी बताकर ऐंठता था लाखों रुपये, दिल्ली से गिरफ्तार

editor
  • Awaaz Desk
  • July 16, 2026 11:07 AM
 Uttarakhand: Former Chief Secretary's son accused of multi-crore fraud using a fake identity! He used to extort lakhs of rupees by posing as an IPS officer and an official from a central agency; arrested in Delhi.

देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव एस. रामास्वामी के बेटे यशोवर्धन को कथित ठगी, फर्जी पहचान और लोगों से धोखाधड़ी करने के आरोप में देहरादून पुलिस ने दिल्ली से गिरफ्तार किया है। आरोप है कि वह खुद को आईपीएस अधिकारी बताकर लोगों का विश्वास जीतता था। इसके बाद सरकारी योजनाओं, निवेश और प्रभाव का इस्तेमाल कराने का झांसा देकर उनसे लाखों रुपये ऐंठ लेता था। जानकारी के अनुसार आरोपी के पास से वॉकी-टॉकी, सैन्य वर्दी, फर्जी रक्षा मंत्रालय का बैंड तथा सैन्य शैली की टोपियां भी बरामद हुई हैं। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इन सामानों का इस्तेमाल वह लोगों को प्रभावित करने और अपनी फर्जी पहचान को मजबूत दिखाने के लिए करता था या नहीं। पुलिस के अनुसार यशोवर्धन खुद को वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी बताकर डॉक्टरों और अन्य लोगों से संपर्क स्थापित करता था। प्रभावशाली सरकारी पहचान का दावा कर वह पहले लोगों का विश्वास जीतता और फिर सरकारी काम कराने, प्रभाव का इस्तेमाल करने, निवेश दिलाने या विभिन्न योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर उनसे पैसे ले लेता था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कई लोगों को इसी तरीके से आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी ने कितने लोगों को अपना शिकार बनाया और ठगी की कुल राशि कितनी है। शिकायत मिलने के बाद देहरादून के राजपुर थाने में आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। तकनीकी जांच और लोकेशन ट्रैकिंग के दौरान पुलिस को उसकी मौजूदगी दिल्ली में मिली। इसके बाद पुलिस टीम ने दिल्ली में दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर संबंधित न्यायालय में पेश किया गया और आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। पुलिस के अनुसार उसके खिलाफ राजपुर थाने में दो मुकदमे दर्ज हैं।

एमबीबीएस छात्र से 15 लाख रुपये ठगने का आरोप
यशोवर्धन के खिलाफ पहले से दर्ज एक मामले में डाकरा बाजार निवासी एमबीबीएस छात्र अंशुल उपाध्याय ने गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत के अनुसार 24 मार्च को यशोवर्धन से उसकी पहचान हुई थी। आरोपी ने खुद को केंद्र सरकार में कार्यरत और एसओजी से जुड़ा अधिकारी बताते हुए विश्वास में लिया। उसने दिवंगत मां के नाम पर कंपनी पंजीकृत कर श्रद्धांजलि देने और स्टार्टअप इंडिया सहित अन्य सरकारी योजनाओं के माध्यम से 20 से 25 लाख रुपये तक की फंडिंग दिलाने का दावा किया। आरोप है कि इसी बहाने उसने 15 लाख रुपये नकद ले लिए। इसके अलावा उसने दो लाख रुपये लेकर कस्टम विभाग के माध्यम से चार आईफोन उपलब्ध कराने का भी वादा किया, लेकिन न तो फोन उपलब्ध कराए और न ही कंपनी का पंजीकरण कराया। पीड़ित की शिकायत पर राजपुर थाने में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया गया था।

पहले भी विवादों में रह चुका है नाम
यशोवर्धन इससे पहले भी विवादों में रह चुका है। 14 नवंबर 2025 को उत्तराखंड के पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन के बेटे दिव्य प्रताप सिंह के साथ मारपीट के मामले में उसका नाम सुर्खियों में आया था। उस घटना के बाद भी वह चर्चाओं में रहा था।


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