उत्तराखण्डः ऊधम सिंह नगर में फर्जी दस्तावेजों से प्रमाणपत्र बनवाने का खुलासा! बाजपुर में रैंटा-मुंडिया कला के नाम पर तैयार हुए जाति और स्थायी निवास प्रमाणपत्र
बाजपुर। प्रदेश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में अध्ययनरत छात्रों से जुड़े दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान ऊधम सिंह नगर जिले के बाजपुर तहसील क्षेत्र में कूटरचित अभिलेखों के आधार पर स्थायी निवास और जाति प्रमाणपत्र बनवाए जाने का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। राजस्व विभाग की जांच में कई ऐसे दस्तावेज सामने आए, जिनका संबंधित विभागों के सरकारी अभिलेखों से मिलान नहीं हो सका। मामले में ग्राम रैंटा के राजस्व उपनिरीक्षक अजमल खान की तहरीर पर पुलिस ने नौ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान चार लोगों के नाम से जारी स्थायी निवास और जाति प्रमाणपत्रों में अनियमितताएं सामने आने के बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है। राजस्व विभाग ने पूछताछ के दौरान सामने आए तथ्यों और बरामद मोबाइल फोन को भी पुलिस के सुपुर्द किया है। पुलिस अब मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। मामला उत्तराखंड के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में अध्ययनरत छात्रों के प्रमाणपत्रों के सत्यापन के दौरान सामने आया। सत्यापन के लिए बाजपुर तहसील क्षेत्र से जुड़े दस्तावेज पहुंचे तो राजस्व विभाग ने संबंधित अभिलेखों की जांच कराई। इस दौरान कुछ प्रमाणपत्रों में लगाए गए आधार कार्ड, राशन कार्ड, परिवार रजिस्टर, बिजली बिल, स्थानांतरण प्रमाणपत्र, खतौनी, मतदाता सूची और शैक्षिक अभिलेखों का संबंधित विभागों के रिकॉर्ड से मिलान नहीं हुआ। इसके बाद राजस्व विभाग ने मामले की विस्तृत जांच शुरू की। जांच में ग्राम रैंटा और मुंडिया कला का निवासी दर्शाकर कुछ लोगों के नाम से प्रमाणपत्र जारी कराए जाने की जानकारी सामने आई।
राजस्व उपनिरीक्षक अजमल खान की तहरीर के अनुसार चित्रा पुत्री महेश को ग्राम रैंटा का निवासी दर्शाते हुए 20 अगस्त को अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र और 21 अगस्त को स्थायी निवास प्रमाणपत्र जारी किया गया था। इन प्रमाणपत्रों के लिए आधार कार्ड, बिजली का बिल, स्थानांतरण प्रमाणपत्र, राशन कार्ड, परिवार रजिस्टर और खतौनी समेत कई दस्तावेज लगाए गए थे। जांच के दौरान संबंधित विभागों से इन दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया तो विभागों ने इनमें से संबंधित अभिलेख अपने स्तर से जारी किए जाने से इनकार किया। इसके बाद प्रमाणपत्रों की वैधता पर सवाल खड़े हुए और उन्हें निरस्त कर दिया गया। इसी तरह अनुराग भोजवाल पुत्र श्याम बिहारी भोजवाल को ग्राम मुंडिया कला का निवासी दर्शाते हुए तीन जुलाई को अन्य पिछड़ा वर्ग जाति प्रमाणपत्र और छह जुलाई को स्थायी निवास प्रमाणपत्र जारी किया गया था। राजस्व विभाग की जांच में राशन कार्ड और परिवार रजिस्टर में किसी दूसरे व्यक्ति का विवरण मिलने की बात सामने आई। आरोप है कि संबंधित व्यक्ति को कथित तौर पर छलपूर्वक अभिलेखों में जोड़ा गया। राजकीय इंटर कॉलेज के अभिलेखों में भी अनुराग के नाम से संबंधित प्रविष्टि नहीं मिली। ग्राम प्रधान ने भी जांच के दौरान उक्त नाम के व्यक्ति के गांव में निवासरत होने की जानकारी नहीं होने की बात कही। जांच में कुमारी दीक्षा पुत्री शिव नारायण चौधरी के नाम से ग्राम रैंटा निवासी दर्शाते हुए 31 अगस्त को अन्य पिछड़ा वर्ग जाति प्रमाणपत्र और एक सितंबर को स्थायी निवास प्रमाणपत्र जारी किए जाने की जानकारी सामने आई। इन प्रमाणपत्रों में टीसी, परिवार रजिस्टर, वर्ष 1988 की मतदाता सूची, बिजली बिल, राशन कार्ड और आधार कार्ड समेत कई दस्तावेज लगाए गए थे। इसी तरह कुमारी रिया सिंह पुत्री मुन्नी लाल सिंह के नाम से भी रैंटा निवासी दर्शाते हुए एक सितंबर को स्थायी निवास प्रमाणपत्र जारी किया गया था। राजस्व विभाग के अनुसार जांच में सामने आई अनियमितताओं के बाद चारों संबंधित व्यक्तियों के प्रमाणपत्र तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए गए हैं।
पांच हजार से लेकर 50 हजार रुपये तक देने के बयान
मामले की जांच के दौरान 23 सितंबर को संबंधित लोगों को प्रमाणपत्रों के सत्यापन के लिए तहसील कार्यालय बाजपुर बुलाया गया था। पूछताछ के दौरान कई ऐसे बयान सामने आए, जिनमें प्रमाणपत्र बनवाने के लिए रुपये दिए जाने की बात कही गई। राजस्व विभाग की तहरीर के अनुसार मौ. आलम निवासी शिवनगर, सुल्तानपुर पट्टी ने बयान में बताया कि दीक्षा और चित्रा के जाति एवं स्थायी निवास प्रमाणपत्र बनवाने के लिए उसे पांच हजार रुपये दिए गए थे। वहीं अनुराग भोजवाल के पिता श्याम बिहारी भोजवाल ने पूछताछ में बताया कि अपने पुत्र का सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी में दाखिला कराने के लिए जाति और स्थायी निवास प्रमाणपत्र बनवाने के एवज में उन्होंने बरेली निवासी हरपाल को 50 हजार रुपये दिए थे। उन्होंने इस काम में शिवम माथुर, रोहित निवासी हरलालपुर और अर्चना पत्नी आशीष भारद्वाज निवासी मुंडिया कला से मदद मिलने की बात भी कही। पूछताछ में तहसील के एक अधिवक्ता द्वारा भी कथित तौर पर सहयोग किए जाने की बात सामने आई, हालांकि संबंधित व्यक्ति का नाम याद नहीं होने की जानकारी दी गई।
फर्जी किरायेदार सत्यापन की भी जांच
पूछताछ के दौरान फर्जी किरायेदार सत्यापन से जुड़ी बातें भी सामने आईं। राजस्व विभाग की तहरीर के अनुसार शिवम माथुर ने बताया कि वह श्याम बिहारी भोजवाल को रोहित के माध्यम से अर्चना के घर ले गया था और उन्हें कथित रूप से किरायेदार के रूप में तस्दीक करने को कहा गया था। अर्चना ने भी अपने बयान में रोहित द्वारा श्याम बिहारी समेत अन्य लोगों को किरायेदार बनाने के लिए अपने पास लाए जाने की बात कही। वहीं रोहित ने पूछताछ में बताया कि शिवम के कहने पर उसने श्याम बिहारी को अर्चना से मिलवाया और अनुराग के लिए किराये के मकान की व्यवस्था कराई। पुलिस अब इन बयानों की स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि प्रमाणपत्र तैयार कराने और संबंधित दस्तावेज जुटाने में कौन.कौन लोग शामिल थे।