उत्तराखण्डः बागेश्वर में अवैध खड़िया खनन का मामला! कल भी होगी सुनवाई
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बागेश्वर जिले के कांडा तहसील सहित जिले के कई अन्य गांवों में अवैध खड़िया खनन से आई दरारों के मामले में स्वतः संज्ञान लेकर पंजीकृत की गई व कई जनहित याचिकाओं व खनन इकाइयों के मामले पर एक साथ सुनवाई की। पूर्व में कोर्ट ने जिला खान अधिकारी से पूछा था कि खनन कार्य में लगे वाहनों पर जीपीएस सिस्टम लगा है या नही है कोर्ट को अवगत कराएं। लेकिन उनके द्वारा बीते कल कोर्ट से इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए 24 घण्टे का समय मांगा था। जो आज उनके द्वारा कोर्ट में पेश किया गया। इसपर कोर्ट ने मामले की सुनवाई कल भी जारी रखी है। साथ में कोर्ट ने रजिस्ट्री विभाग को यह भी निर्देश दिये हैं कि जुलाई में खनन व्यवसायी नवीन परिहार के खिलाफ जो स्वतः संज्ञान लेकर अवमानना याचिका दायर की गई थी उसे भी कल सुनवाई के लिए इन याचिकाओं के साथ सूचीबद्ध करें। याचिकाकर्ता का कहना है कि खनन कार्य में लगे वाहनों पर जीपीएस सिस्टम लगाना अनिवार्य है। उन वाहनों का ई रमन्ना पोर्टल पर भी इंट्रीरिग्रेशन होना भी अनिवार्य है। जो खनन नियवमली में दर्ज है। लेकिन कई वाहनों पर जीपीएस सिस्टम नही लगा होने के कारण अवैध खनन हो रहा है। इसलिए इसकी रिपोर्ट मंगाई जाय। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश जी नरेंद व न्यायमूर्ती सुभाष उपाध्याय की खण्डपीठ में हुई। पूर्व में कांडा तहसील के ग्रामीणों ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजकर कहा था कि अवैध खड़िया खनन से उनकी खेतीबाड़ी, घर, पानी की लाइनें चौबट हो चुकी है। जो धन से सपन्न थे उन्होंने अपना आशियाना हल्द्वानी व अन्य जगह पर बना दिया है। अब गावों में निर्धन लोग ही बचे हुए हैं। उनके जो आय के साधन थे उनपर अब खड़िया खनन के लोगों की नजर टिकी हुई है। इस सम्बंध में कई बार उच्च अधिकारियों को प्रत्यावेदन भी दिए, लेकिन उनकी समस्या का कुछ हल नही निकला। इसलिए अब हम न्यायालय की शरण में आये हैं। उनकी समस्या का समाधान किया जाय।