उत्तराखण्डः चमोली के ब्रह्मसैण में भू-धंसाव! कई जिलों में ऑरेंज और येलो अलर्ट
चमोली/देहरादून। उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश पहाड़ी क्षेत्रों में नई मुसीबत खड़ी कर रही है। गोपेश्वर जिला मुख्यालय से घिंघराण को जोड़ने वाले मोटर मार्ग पर स्थित ब्रह्मसैण क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे भू-धंसाव ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। सड़क के निचले हिस्से में जमीन लगातार खिसकने से अब इसका असर सड़क तक पहुंचने लगा है। इससे जहां यातायात प्रभावित हो रहा है, वहीं सड़क के आसपास बने आवासीय और व्यावसायिक भवनों पर भी खतरा मंडराने लगा है। ब्रह्मसैण क्षेत्र में भू-धंसाव की समस्या कोई नई नहीं है। पिछले वर्ष से ही यहां सड़क के निचले हिस्से में जमीन खिसकने का सिलसिला शुरू हो गया था। समय के साथ भू-धंसाव का दायरा बढ़ता गया और अब स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। स्थानीय लोगों के मुताबिक सड़क से करीब 50 मीटर नीचे जमीन लगातार धंस रही है। बारिश के दौरान भू-धंसाव की रफ्तार और बढ़ने से खतरा सड़क के ऊपरी हिस्से तक पहुंचने लगा है। भू-धंसाव का सीधा असर गोपेश्वर-घिंघराण मोटर मार्ग पर पड़ रहा है। सड़क के एक हिस्से में जमीन खिसकने के कारण मार्ग की स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। हालात बिगड़ने के कारण छोटे वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है। स्थानीय लोगों को आशंका है कि यदि भू-धंसाव इसी रफ्तार से जारी रहा तो आने वाले दिनों में सड़क का बड़ा हिस्सा इसकी चपेट में आ सकता है। सड़क के आसपास कई आवासीय और व्यावसायिक भवन भी मौजूद हैं। जमीन खिसकने का दायरा बढ़ने के साथ ही इन भवनों के स्वामियों की चिंता भी बढ़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते भू-धंसाव का स्थायी उपचार नहीं किया गया तो भविष्य में सड़क के साथ-साथ बस्ती के लिए भी बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। क्षेत्र में भू-धंसाव की गंभीरता को देखते हुए पहले ही ट्रीटमेंट के लिए कार्ययोजना तैयार की गई थी। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि अभी तक इसका अपेक्षित असर धरातल पर दिखाई नहीं दिया है। इसी बीच मानसून की बारिश ने समस्या को और गंभीर बना दिया है। लोक निर्माण विभाग की ओर से सड़क को दुरुस्त करने और आवागमन सुचारु रखने के प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, जिस तरह से सड़क के नीचे लगातार जमीन खिसक रही है, उसे देखते हुए केवल सड़क की मरम्मत से समस्या का स्थायी समाधान कितना संभव होगा, इस पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों की मांग है कि भू-धंसाव के वास्तविक कारणों का वैज्ञानिक अध्ययन कर स्थायी ट्रीटमेंट कराया जाए।
बारिश ने बढ़ाई पहाड़ों की परेशानी
उत्तराखंड में मानसून के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में भू-धंसाव, भूस्खलन और सड़क बाधित होने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। रुक-रुककर हो रही बारिश के बीच कमजोर पहाड़ी ढलानों पर खतरा और बढ़ गया है। ब्रह्मसैण में भी बारिश को भू-धंसाव बढ़ने की प्रमुख वजहों में माना जा रहा है। मौसम विभाग ने रविवार को भी प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश का पूर्वानुमान जताते हुए अलर्ट जारी किया है। देहरादून, नैनीताल, बागेश्वर, चंपावत और ऊधमसिंह नगर में भारी से बहुत भारी बारिश और आकाशीय बिजली की संभावना को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश के दौर की संभावना जताई गई है। वहीं, प्रदेश के अन्य जिलों में भी कहीं-कहीं भारी बारिश होने की संभावना है। शेष जनपदों में गरज और आकाशीय बिजली चमकने को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में जाने से बचने की अपील की है।