• Home
  • News
  • Uttarakhand: Legal action initiated regarding railway land in Mussoorie! Eviction notices issued to several buildings; failure to respond within seven days could lead to unilateral eviction.

उत्तराखण्डः मसूरी में रेलवे की जमीन पर कानूनी शिकंजा! कई भवनों को बेदखली का नोटिस, सात दिन में जवाब नहीं देने पर हो सकती है एकपक्षीय बेदखली

editor
  • Awaaz Desk
  • August 02, 2026 08:08 AM
Uttarakhand: Legal action initiated regarding railway land in Mussoorie! Eviction notices issued to several buildings; failure to respond within seven days could lead to unilateral eviction.

मसूरी। मसूरी के झड़ीपानी क्षेत्र में रेलवे की भूमि पर बने होटलों और अन्य भवनों पर अब बेदखली की तलवार लटक गई है। उत्तर रेलवे, मुरादाबाद मंडल ने सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम, 1971 के तहत कई संपत्तियों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए सात दिनों के भीतर जवाब मांगा है। माना जा रहा है कि उत्तराखंड हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद रेलवे प्रशासन अब अपनी जमीन पर वर्षों से चले आ रहे कथित अतिक्रमणों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई के मूड में है। रेलवे के संपदा अधिकारी द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि संबंधित भवन और होटल वर्ष 2011 से रेलवे की भूमि पर कथित रूप से अनधिकृत कब्जे में हैं। ऐसे में अधिनियम की धारा-4 के तहत संबंधित पक्षों से पूछा गया है कि उनके खिलाफ बेदखली का आदेश क्यों न पारित किया जाए। नोटिस में साफ चेतावनी दी गई है कि यदि सात दिनों के भीतर संतोषजनक जवाब और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए तो मामले में एकपक्षीय कार्रवाई करते हुए बेदखली का आदेश जारी किया जा सकता है। इस पूरी कार्रवाई की सबसे अहम कड़ी उत्तराखंड हाईकोर्ट में लंबित वाद संख्या 2992/2023 है। 16 जून 2026 को हाईकोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुपालन में रेलवे ने अपनी संपत्तियों का रिकॉर्ड खंगालना शुरू किया है और जहां भी कथित अतिक्रमण सामने आ रहे हैं, वहां कानूनी प्रक्रिया के तहत नोटिस जारी किए जा रहे हैं। झड़ीपानी क्षेत्र में जारी इस कार्रवाई से होटल व्यवसायियों और भवन स्वामियों में हलचल मच गई है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा उनकी कानूनी जिम्मेदारी है। यदि कोई व्यक्ति या संस्था बिना वैध अनुमति रेलवे की भूमि का उपयोग कर रही है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करना आवश्यक है। अधिकारियों के मुताबिक किसी भी कब्जाधारी को पहले अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाता है और उसके बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाता है। कानूनी विशेषज्ञों का भी मानना है कि सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम, 1971 के तहत जारी नोटिस अंतिम आदेश नहीं होता, बल्कि यह संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने का अवसर प्रदान करता है। यदि कब्जाधारी वैध दस्तावेज या कानूनी अधिकार साबित नहीं कर पाते हैं तो संपदा अधिकारी बेदखली का आदेश पारित कर सकते हैं। गौरतलब है कि इससे पहले भी मसूरी और देहरादून क्षेत्र में रेलवे की भूमि पर बने कई व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और निर्माणों को लेकर नोटिस जारी किए जा चुके हैं। लेकिन हाईकोर्ट के हालिया आदेश के बाद कार्रवाई की रफ्तार तेज होती दिखाई दे रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में रेलवे की भूमि पर बने अन्य कथित अतिक्रमण भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।


संबंधित आलेख: