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छत्तीसगढ़ में विकास की तस्वीर से रूबरू हुआ उत्तराखंड का मीडिया दल! आधुनिक तकनीक, सुरक्षा और पर्यावरण प्रबंधन का लिया जायजा, मियावाकी मॉडल ने खींचा ध्यान

editor
  • Awaaz Desk
  • September 16, 2026 05:09 AM
Uttarakhand media delegation witnesses the face of development in Chhattisgarh! They assessed modern technology, safety measures, and environmental management, with the Miyawaki model drawing particular attention.

देहरादून। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) देहरादून की ओर से आयोजित पांच दिवसीय अध्ययन एवं मीडिया एक्सपोजर टूर के दूसरे दिन उत्तराखंड के 13 सदस्यीय मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने छत्तीसगढ़ स्थित साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की गेवरा ओपनकास्ट कोयला खदान का भ्रमण किया। मीडिया दल ने खदान में कोयला उत्पादन की प्रक्रिया के साथ आधुनिक तकनीक, सुरक्षा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों को करीब से देखा और अधिकारियों से विभिन्न पहलुओं की जानकारी ली। भ्रमण के दौरान पत्रकारों को बताया गया कि कोयला खनन केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि खदान संचालन में श्रमिकों की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण, भूमि पुनर्वास और तकनीकी दक्षता पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। प्रतिनिधिमंडल ने खदान क्षेत्र में पहुंचकर कोयला निकालने से लेकर ओवरबर्डन हटाने, कोयले की हैंडलिंग और उसके परिवहन तक की पूरी प्रक्रिया को समझा। अधिकारियों ने मीडिया दल को उच्च क्षमता वाली आधुनिक मशीनरी के इस्तेमाल की जानकारी देते हुए बताया कि खनन कार्य में शॉवेल-डंपर संयोजन, सरफेस माइनर और रिपर तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अलावा खनन गतिविधियों की निगरानी और संचालन में डिजिटल तकनीक की भूमिका के बारे में भी पत्रकारों को जानकारी दी गई।

एसईसीएल के क्षेत्रीय महाप्रबंधक संजय मिश्रा ने कहा कि देश के विकास और ऊर्जा जरूरतों में कोयले की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि उद्योगों और विभिन्न ऊर्जा आवश्यकताओं के साथ लंबे समय से कोयला देश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण ऊर्जा स्रोत रहा है। कंपनी उत्पादन बढ़ाने के साथ श्रमिकों की सुरक्षा, सामाजिक दायित्व और पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दे रही है। महाप्रबंधक (ऑपरेशंस) धीरज चौधरी ने प्रतिनिधिमंडल को गेवरा खदान की उत्पादन क्षमता, संचालन व्यवस्था और सुरक्षा प्रोटोकॉल की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गेवरा दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी और एशिया की नंबर वन ओपनकास्ट कोयला खदान है। वर्ष 2023-24 में यहां करीब 59.1 मिलियन टन कोयले का उत्पादन हुआ था। खदान से देश के सात राज्यों को कोयले की आपूर्ति की जाती है और यह भारत के कुल कोयला उत्पादन में करीब छह प्रतिशत का योगदान देती है। उन्होंने बताया कि उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ सुरक्षा मानकों को मजबूत बनाए रखने पर भी लगातार काम किया जा रहा है। भविष्य की योजनाओं के तहत एसईसीएल अगले वर्ष दुनिया की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी बनने की दिशा में आगे बढ़ रही है। मीडिया प्रतिनिधिमंडल को खदान क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण के लिए अपनाए जा रहे विभिन्न उपायों की जानकारी भी दी गई। इनमें वनीकरण, मियावाकी तकनीक से पौधरोपण, धूल नियंत्रण, खदान के पानी का प्रबंधन और भूमि पुनर्वास जैसी पहल शामिल हैं। मीडिया दल ने मियावाकी तकनीक से तैयार किए जा रहे हरित क्षेत्र का भी जायजा लिया। अधिकारियों के अनुसार करीब दो हेक्टेयर क्षेत्र में 20 हजार पौधे लगाए गए हैं और इनका सर्वाइवल रेट करीब 70 प्रतिशत बताया गया। कम भूमि में सघन वन तैयार करने वाली मियावाकी तकनीक ने उत्तराखंड के पत्रकारों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।

सीमित भू-भाग वाले उत्तराखंड में भी इस तकनीक की संभावनाओं पर चर्चा हुई। बताया गया कि सघन हरित क्षेत्र कार्बन डाइऑक्साइड के अवशोषण में योगदान देने के साथ पर्यावरणीय संतुलन में भी उपयोगी हो सकता है। टूर के संचालन अधिकारी एवं पीआईबी देहरादून के सहायक निदेशक संजीव सुंद्रियाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में विकास, ऊर्जा उत्पादन, सुरक्षा और पर्यावरणीय प्रबंधन के मॉडल का अध्ययन उत्तराखंड के लिए भी लाभकारी सिद्ध हो सकता है। उन्होंने कहा कि इस तरह के मीडिया एक्सपोजर टूर पत्रकारों को केंद्र सरकार की विकास परियोजनाओं और विभिन्न क्षेत्रों में अपनाई जा रही तकनीकों को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर देते हैं। उन्होंने कहा कि मीडिया प्रतिनिधियों के प्रत्यक्ष अनुभव से विकास परियोजनाओं की जमीनी तस्वीर को बेहतर तरीके से समझने और जनता तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। पांच दिवसीय अध्ययन एवं मीडिया एक्सपोजर टूर के अगले चरण में बुधवार को मीडिया प्रतिनिधिमंडल कोरबा में एनटीपीसी और भारत एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड (बाल्को) का दौरा करेगा। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल को ऊर्जा उत्पादन, औद्योगिक गतिविधियों, तकनीकी प्रबंधन और संबंधित परियोजनाओं की कार्यप्रणाली की जानकारी दी जाएगी। इस अध्ययन यात्रा के माध्यम से उत्तराखंड के पत्रकार देश के अलग-अलग हिस्सों में संचालित प्रमुख विकास और औद्योगिक परियोजनाओं को करीब से समझ रहे हैं।


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