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उत्तराखण्डः त्रियुगीनारायण में सात फेरों के लिए उमड़ रहे देशभर के नवविवाहित जोड़े! शिव-पार्वती की पवित्र विवाहस्थली में नवंबर से अब तक 1564 से अधिक शादियां

editor
  • Awaaz Desk
  • August 26, 2026 12:08 PM
Uttarakhand: Newlywed couples from across the country are flocking to Triyuginarayan for their wedding vows! Over 1,564 weddings have taken place since November at the sacred wedding site of Shiva and Parvati.

रुद्रप्रयाग। भगवान शिव और माता पार्वती के पवित्र विवाह स्थल त्रियुगीनारायण में इन दिनों सात फेरों के लिए नवयुगलों का उत्साह चरम पर है। देश के विभिन्न हिस्सों से जोड़े यहां पहुंचकर भगवान शिव-पार्वती को साक्षी मानकर विवाह बंधन में बंध रहे हैं। तीन युगों से प्रज्वलित मानी जाने वाली अखंड धूनी को साक्षी मानकर नवदंपती अपने वैवाहिक जीवन की नई शुरुआत कर रहे हैं। रुद्रप्रयाग जनपद में स्थित त्रियुगीनारायण धाम भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। मान्यता है कि इसी पवित्र धरा पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। विवाह की साक्षी बनी पवित्र अग्नि आज भी यहां अखंड धूनी के रूप में प्रज्वलित है। यही वजह है कि त्रियुगीनारायण में विवाह करने को लेकर नवयुगलों में खासा आकर्षण बना हुआ है। बीकेटीसी उपाध्यक्ष विजय कप्रवान ने बताया कि  नवंबर 2025 से जुलाई 2026 तक शुभ मुहूर्तों में त्रियुगीनारायण में 1564 से अधिक शादियां संपन्न हो चुकी हैं। देश के अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों से लोग यहां विवाह के लिए पहुंच रहे हैं। नवदंपती अखंड धूनी को साक्षी मानकर सात फेरे लेते हैं और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने माता पार्वती से विवाह किया। मान्यता है कि इस दिव्य विवाह में भगवान विष्णु ने माता पार्वती के भाई की भूमिका निभाई, जबकि भगवान ब्रह्मा ने वैदिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह संपन्न कराया। त्रियुगीनारायण मंदिर परिसर में मौजूद अखंड धूनी को उसी पवित्र अग्नि का प्रतीक माना जाता है, जो शिव-पार्वती विवाह के समय प्रज्वलित हुई थी। मान्यता है कि यह धूनी तीन युगों से लगातार जल रही है। मंदिर परिसर में स्थित ब्रह्मकुंड, विष्णुकुंड और रुद्रकुंड भी श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। वहीं 22 अप्रैल से अब तक दो लाख 35 हजार से अधिक श्रद्धालु त्रियुगीनारायण मंदिर पहुंच चुके हैं। बढ़ती श्रद्धालु आवाजाही और विवाह समारोहों से क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिल रहा है। व्यापार संघ के अध्यक्ष महेंद्र सेमवाल के मुताबिक, बड़ी संख्या में नवयुगलों और श्रद्धालुओं के पहुंचने से स्थानीय कारोबार में भी तेजी आई है। होटल, होम स्टे, पूजा सामग्री, फूल-माला और अन्य स्थानीय व्यवसायों को इसका सीधा लाभ मिल रहा है। कुल मिलाकर भगवान शिव और माता पार्वती के पवित्र विवाह स्थल त्रियुगीनारायण में बढ़ती विवाह और धार्मिक पर्यटन गतिविधियां न केवल आस्था का केंद्र बनी हुई हैं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी नई संभावनाएं पैदा कर रही हैं। अखंड धूनी को साक्षी मानकर सात फेरे लेने की परंपरा देशभर के नवयुगलों को लगातार त्रियुगीनारायण की ओर आकर्षित कर रही है।


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