उत्तराखंड नाईट कर्फ़्यू:कड़कड़ाती ठंड में जब कोई घर से निकलता ही नही तो नाईट कर्फ़्यू का क्या औचित्य? संक्रमण नेताओं की रैलियों में नही जाता क्या? पूछती है जनता
उत्तराखंड में ओमिक्रोन के बढ़ते हुए खतरे को देखते हुए राज्य सरकार ने नाईट कर्फ़्यू लागू कर दिया है। रात 11बजे से सुबह 5 बजे तक नाईट कर्फ़्यू लगाया जा रहा है। एक ओर राजनीतिक पार्टियां चुनाव की तैयारियां खूब जोरो शोरो से कर रही है,आये दिन जनसभाएं हो रही है पीएम मोदी भी 30 दिसम्बर को हल्द्वानी में जनसभा करने वाले है दूसरी ओर रात की कड़कड़ाती ठंड में जब कोई परिंदा भी पर मारने से बच रहा हो सरकार ने नाईट कर्फ़्यू लगाया है जो कि आम जनता की समझ से परे है। सोशल मीडिया में लोग नाईट कर्फ़्यू को लेकर सवाल पूछ रहे है कि दिन में क्या कोरोना या कोरोना का नया वैरिएंट ओमिक्रोन सोता तो नही है? बल्कि दिन में ओमिक्रोन का खतरा ज़्यादा है क्योंकि बाजारों में भीड़ ,रैलियों में भीड़ हर जगह भीड़ लगी रहती है। रात को सड़के सुनसान रहती है,ख़ासकर पहाड़ी इलाकों में इनदिनों तापमान जमा देने वाला है शाम 8 बजने से पहले ही लोग घरों में कैद हो रहे है ठंड से बचने के लिए स्ट्रीट एनिमल भी गलियों में या घरों के बाहर किसी तरह खुद को किसी तरह महफूज़ रखने की कोशिश करते है। ऐसे में रात को नाईट कर्फ़्यू लगाने का औचित्य समझ आना मुश्किल है।
गौरतलब है कि राज्य सरकार ओमिक्रोन के खतरे को लेकर अब और ज़्यादा पाबंदियां लगाने की सोच रही है। मुख्य सचिव एसएस संधू ने राज्य के सभी जिलाधिकारियों को ओमिक्रोन से बचने के लिए निर्देश दिए है। उन्होंने कहा कि सभी जिलों में कोविड के मामलों पर लगातार नजर बनाए रखें। जनसंख्या और इसके घनत्व के अनुरूप ओमिक्रॉन को फैलने से रोकने के लिए कंटेनमेंट जोन और प्रतिबंधों लगाए जाएं। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को कंटेनमेंट स्ट्रैटेजी, टेस्टिंग, ट्रेकिंग, आइसोलेशन, सर्विलांस, पर्याप्त क्लीनिकल प्रबंधन, टीकाकरण और कोविड अनुकूल व्यवहार के अनुपालन की कार्रवाई किए जाने के निर्देश दिए।
मामले बढ़ने पर लोगों की संख्या होगी सीमित
उन्होंने कोविड मामलों के बढ़ने पर नाइट कर्फ्यू, अधिक भीड़ एकत्र होने पर प्रतिबंध, विवाह और अंत्येष्टि में संख्या कम करना, कार्यालयों, उद्योगों और सार्वजनिक परिवहन में संख्या सीमित करने जैसे कदम उठाए जाने के निर्देश दिए हैं।