उत्तराखंड:राज्य के 71 विधायकों में से केवल नैनीताल के विधायक संजीव आर्य ने सर्वाधिक विधायक निधि का किया उपयोग,एक रिपोर्ट!
उत्तराखंड इनदिनों चुनावी मोड पर है। हर तरफ सियासी रंग परवान चढ़ा हुआ है। नेतागण अपनी दावेदारी पेश करने में लगे हुए है,न दिन को चैन है न रात को सुकून। उधर जनता भी पिछले सालों में हुए विकास और उन्हें मिली सुविधाओं का आंकलन कर ही वोट देने का मन बना रही है। विकास की बात की जा रही है तो उत्तराखंड में 71 विधायको में से 12 विधायकों की विधायक निधि 70 फीसदी से कम खर्च हुई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक उत्तराखंड के 71 विधायकों में से केवल नैनीताल विधायक संजीव आर्य ही ऐसे विधायक है जिन्होंने अपनी विधायक निधि सर्वाधिक 90 प्रतिशत खर्च की है। जी हां! संजीव आर्य ने अपनी विधायक निधि को विकास कार्य मे और विधायकों की अपेक्षा अधिक खर्च किया है।
विधानसभा चुनाव में अब कम वक्त बचा है जनवरी माह में आचार संहिता भी लग जायेगी ऐसे में उत्तराखंड के विधायकों के पास भी विधायक निधि खर्च करने के लिए समय कम ही बचा है ।आंकड़ों के हिसाब से 2021 सितंबर तक उत्तराखंड में 293 करोड़ की विधायक निधि खर्च नही हो पाई है,जिससे साफ जाहिर है कि विकास कार्यो के लिए आवंटित की गई निधि जब खर्च ही नही हुई तो विकास कार्य कितने हुए होंगे। पिछले दो सालों में कोरोना काल के चलते विधायकों को स्वास्थ्य उपकरण खरीदने के लिए विधायक निधि से एक एक करोड़ रुपये जारी करने की अनुमति दी गयी थी,लेकिन ये निधि भी समय पर इस्तेमाल नही की गई।विधानसभा सत्र में सदन के भीतर इस मुद्दे पर विपक्ष ने सवाल खड़े किए थे,कहा था कि कोरोना काल मे स्वास्थ्य उपकरणों को खरीदने के लिए जारी की गई विधायक निधि से आज तक उपकरण नही खरीदे गए।
आपको बता दें कि उत्तराखंड में विधायकों को 2017 से सितंबर 2021 तक कुल 1256. 50 करोड़ रुपए की विधायक निधि उपलब्ध हुई थी,जिसमे से सितंबर 2021 तक केवल 963.40 करोड़ रुपए की विधायक निधि खर्च हुई यानी कुल 77 प्रतिशत निधि ही विकास कार्यो में लगी जिसमे से कमीशनखोरी का अनुमान आप लगा सकते है,बाकी बची हुई 23 प्रतिशत यानी 293.10 करोड़ रुपए की विधायक निधि खर्च होना बाकी है और इतनी बड़ी राशि को खर्च करने के लिए विधायको के पास बमुश्किल एक महीना भी नही बचा है। अगर सही समय पर योजनाओं पर कार्य किया जाता तो विकास भी होता और जनता जनप्रतिनिधियों से नाराज़ नही होती।