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उत्तराखण्डः सितारगंज सरस्वती आत्महत्या प्रकरण! प्यार और दोस्ती की कहानी का खौफनाक अंत, दो आरोपी गिरफ्तार

editor
  • Awaaz Desk
  • September 18, 2026 07:09 AM
Uttarakhand: Saraswati suicide case in Sitarganj! A tragic end to a story of love and friendship; two accused arrested.

सितारगंज। सितारगंज बाईपास रोड पर विगत 15 अगस्त को टुकटुक में आग लगने की घटना में महिला सरस्वती की मौत के मामले का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। इस मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपियों की भूमिका अलग-अलग सामने आई है। एक आरोपी पर महिला पर लगातार मानसिक दबाव बनाने, संबंध और विवाह के लिए दबाव डालने तथा आत्महत्या की धमकी देने का आरोप है, जबकि दूसरे आरोपी पर घटना से पहले आत्महत्या के लिए आवश्यक साधन उपलब्ध कराने और महिला को घटनास्थल तक पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। पुलिस के मुताबिक, मृतका के पिता की तहरीर पर सितारगंज कोतवाली में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। जांच के दौरान पुलिस ने सीडीआर, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल फोन से मिली ऑडियो रिकॉर्डिंग और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का परीक्षण किया। पुलिस के अनुसार, 15 अगस्त 2026 को सितारगंज बाईपास रोड पर एक टुकटुक में आग लगने की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंची पुलिस को टुकटुक में पवित्र सरकार और सरस्वती के झुलसने की जानकारी मिली। दोनों को तत्काल उपचार के लिए सितारगंज उपजिला चिकित्सालय ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद दोनों को अलग-अलग अस्पतालों में रेफर किया गया। सरस्वती की हालत गंभीर होने के कारण उसे एम्स ऋषिकेश रेफर किया गया, जहां उपचार के दौरान 19 अगस्त को उसकी मौत हो गई। घटना के बाद मृतका के पिता दयाल चंद्र मंडल की तहरीर पर सितारगंज कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया और पुलिस ने मामले की विस्तृत जांच शुरू की। मामले को गंभीरता से लेते हुए एसएसपी अजय गणपति ने अधीनस्थ अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए। इसके बाद पुलिस अधीक्षक रुद्रपुर और क्षेत्राधिकारी सितारगंज के निर्देशन तथा प्रभारी निरीक्षक सितारगंज के नेतृत्व में पुलिस टीम ने जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने मृतका और आरोपियों के बीच संपर्क, घटना से पहले की गतिविधियों तथा घटनाक्रम से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की पड़ताल की। पुलिस के अनुसार, जांच में पवित्र सरकार और जितेन्द्र उर्फ बंकिम सरकार की अल-अलग भूमिका सामने आई।

चार साल के संबंध के बाद बढ़ा विवाद
पुलिस जांच में पता चला कि पवित्र सरकार उर्फ कन्हई और सरस्वती के बीच करीब तीन से चार वर्षों से संबंध थे। सरस्वती अपने पति से पारिवारिक विवाद के चलते अपनी दो बेटियों के साथ मायके में रह रही थी। पुलिस का कहना है कि दोनों के संबंधों की जानकारी पवित्र सरकार की पत्नी और परिवार के अन्य सदस्यों को होने के बाद विवाद की स्थिति बनने लगी। पुलिस के मुताबिक, पवित्र सरकार सरस्वती से संबंध बनाए रखने और विवाह को लेकर दबाव डालता था। जांच में उसके द्वारा सरस्वती को मानसिक रूप से परेशान करने और आत्महत्या की धमकी देने के तथ्य सामने आने का दावा किया गया है। दूसरी ओर, पुलिस के अनुसार सरस्वती ने अपनी मां से पवित्र सरकार द्वारा परेशान किए जाने और उससे पीछा छुड़ाने की इच्छा की बात कही थी। परिवार के विरोध के बाद पवित्र ने उससे बातचीत कम कर दी और मोबाइल नंबर भी बंद कर दिया। पुलिस का दावा है कि कई दिनों तक दोनों के बीच बातचीत नहीं होने के कारण सरस्वती मानसिक रूप से परेशान थी। पुलिस के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों में घटना से पहले पवित्र सरकार की ओर से सरस्वती पर कथित मानसिक दबाव बनाए जाने के तथ्य सामने आए। जांच में संबंध और विवाह के लिए दबाव तथा आत्महत्या से जुड़ी धमकियों का भी उल्लेख मिला। इन तथ्यों के आधार पर पुलिस ने मामले में धाराओं में संशोधन करते हुए आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण से संबंधित धारा 108 बीएनएस को शामिल किया। पुलिस ने पवित्र सरकार उर्फ कन्हई को 14 सितंबर को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से उसे जिला कारागार हल्द्वानी भेज दिया गया।

दूसरे आरोपी की भूमिका भी जांच में आई सामने
जांच के दौरान पुलिस को जितेन्द्र उर्फ बंकिम सरकार की भूमिका के बारे में भी जानकारी मिली। पुलिस के अनुसार, जितेन्द्र पहले से सरस्वती को जानता था और दोनों ने एक कंपनी में साथ काम किया था। पुलिस का दावा है कि जितेन्द्र सरस्वती को पसंद करता था और उससे विवाह करना चाहता था, जबकि सरस्वती उसे दोस्त मानती थी तथा पवित्र सरकार के साथ संबंध में थी। पुलिस के अनुसार, जितेन्द्र चाहता था कि सरस्वती और पवित्र सरकार के बीच संबंध खत्म हो जाएं। जांच में घटना से पहले दोनों के बीच लगातार फोन पर बातचीत के तथ्य सामने आए। पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान सरस्वती के मोबाइल फोन से घटना वाले दिन जितेन्द्र के साथ हुई छह ऑडियो रिकॉर्डिंग मिलीं। पुलिस का दावा है कि इन रिकॉर्डिंग में घटना से पहले आवश्यक सामान की व्यवस्था और मिलने को लेकर बातचीत दर्ज थी। इसके अलावा पुलिस ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का परीक्षण किया। इन सभी साक्ष्यों को जोड़ने के बाद पुलिस ने जितेन्द्र की भूमिका को भी आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण के मामले से जोड़ा।

घटना से पहले मदद करने का आरोप
पुलिस के अनुसार, जितेन्द्र ने घटना से पहले सरस्वती को आवश्यक साधन उपलब्ध कराया और उसे पवित्र सरकार के टुकटुक तक पहुंचाया। पुलिस का दावा है कि जितेन्द्र को उस समय की परिस्थितियों की जानकारी थी और वह घटना से ठीक पहले सरस्वती के संपर्क में था। जांच में सामने आए साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने जितेन्द्र के खिलाफ भी धारा 108 बीएनएस के तहत कार्रवाई की। उसे 15 सितंबर को हिरासत में लिया गया। पुलिस टीम में प्रभारी निरीक्षक सुंदरम शर्मा, वरिष्ठ उपनिरीक्षक एवं विवेचक जावेद मलिक, हेड कांस्टेबल मतलूब खान, हेड कांस्टेबल जगदीश सिंह कोठियाल, कांस्टेबल कृष्ण चंद्र और कांस्टेबल प्रेम कनवाल शामिल रहे।


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