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उत्तराखण्डः वारूणी पैदल पदयात्रा! मिलता है अश्वमेध यज्ञ कराने जैसा लाभ, जानें क्या है इसका महत्व

editor
  • Awaaz Desk
  • April 07, 2024 07:04 AM
Uttarakhand: Varuni Walking Tour! One gets benefits like performing Ashwamedha Yagya, know its importance

उत्तरकाशी। प्राकृतिक सुंदरता के बीचों-बीच पंचकोसी वारुणी नाम से हर साल होने वाली वारुणी पैदल पदयात्रा का बड़ा धार्मिक महत्व माना जाता है। कहा जाता है कि इस यात्रा को पूर्ण करने वाले व्यक्ति को 33 करोड़ देवी देवताओं की पूजा-अर्चना का पुण्य लाभ मिलता है। यह भी मान्यता है कि वारुणी पैदल यात्रा करनें ईष्ट मित्रों सगे संबंधियों के साथ शामिल होंने मात्र से अश्वमेध यज्ञ कराने जैसा लाभ मिलता है। बता दें कि पैदल यात्रा लगभग 15 से 18 किमी लंबी इस पदयात्रा की शुरुआत कर श्रद्धालु बड़ेथी गंगा जी के संगम स्थित वरुणेश्वर मंदिर से गंगाजल भर कर बसूंगा गांव के अखंडेश्वर, साल्डगांव के जगरनाथ व अष्टभुजा दुर्गा मंदिर, में जलाभिषेक कर निरंतर आगे बढ़ते हुए ज्ञाणजागांव के ज्ञानेश्वर मंदिर व्यास कुंड से वरुणावत शीर्ष पर शिखेरश्वर, विमलेश्वर महादेव, उतरते हुए काशी के विश्वनाथ मंदिर दर्शन और उत्तरकाशी, जोशियाड़ा, कुटैटी देवी का मनोरम दृश्य देखते हुए उतराई में उतरते है। जहां से प्राकृतिक खूबसूरती चीड़ बांझ.बुरांश के साथ अन्य बेल पत्रों के साथ बनते बनती है। इस बीच संग्राली में कंडार देवता, पाटा में नरर्वेदश्वर मंदिर के दर्शन के बाद हजारों लाखों की संख्या में श्रद्धालु गंगोरी पहुंचते हैं। असी गंगा और भागीरथी में स्नान के बाद विश्वनाथ मंदिर में जलाभिषेक करते हैं और जलाभिषेक के साथ यात्रा का पुण्य प्राप्त कर घर लौटते हैं। दूर-दूर से श्रद्धालू आए रहते हैं। स्थानीय लोगों को रोजगार से लेकर दान पुण्य करनें का अवसर मिलता है। कई संस्थाएं, संगठन, गांव, क्षेत्रवासी, जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता भंडारा भी पैदल यात्रियों के लिए आयोजित करते हैं।


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