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उत्तराखंड में 'वोटर लिस्ट' महाअभियान: 8.32 लाख एएसडी मतदाता बने बड़ी चुनौती, 14 जुलाई से नोटिस जारी कर होगा फैसला

editor
  • Tapas Vishwas
  • July 03, 2026 09:07 AM
'Voter List' Mega-Drive in Uttarakhand: 8.32 Lakh ASD Voters Pose a Major Challenge; Notices to be Issued Starting July 14 to Determine Status

उत्तराखंड में आगामी चुनावों के मद्देनजर मतदाता सूची को पूरी तरह पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाने के लिए चलाया जा रहा 'विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण'  अभियान अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। 8 जून से शुरू हुआ यह महाअभियान आगामी 7 जुलाई को समाप्त होने जा रहा है। इस अभियान के बीच राज्य निर्वाचन आयोग के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रदेश के करीब 8.32 लाख एएसडी मतदाता बन गए हैं। इतनी बड़ी संख्या में संदिग्ध मतदाताओं के सामने आने के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने बूथ स्तर पर दोबारा गहन समीक्षा करने का फैसला लिया है। आगामी 14 जुलाई को मतदाता सूची का ड्राफ्ट पब्लिश किया जाएगा, जिसके बाद आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया शुरू होगी।

उत्तराखंड  में चल रहे एसआईआर अभियान के दौरान कुल 79,60,762 मतदाताओं में से 8,32,834 मतदाता ऐसे चिन्हित हुए हैं जो एएसडी श्रेणी में आते हैं। यानी ये वो मतदाता हैं जो या तो अपने मूल स्थान से अनुपस्थित हैं, कहीं और शिफ्ट हो चुके हैं, या फिर उनकी मृत्यु हो चुकी है। आंकड़ों के मुताबिक, इस श्रेणी के सबसे ज्यादा मतदाता उधमसिंह नगर, देहरादून और हरिद्वार जिले में हैं। यही वजह है कि निर्वाचन आयोग का विशेष फोकस इन तीन मैदानी जिलों पर है। इसके अलावा अल्मोड़ा, बागेश्वर, चंपावत और पिथौरागढ़ जैसे पर्वतीय जिलों में भी बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता चिन्हित किए गए हैं और उन्हें ढूंढा जा रहा है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, राज्य के कुल 79.60 लाख मतदाताओं में से 70,83,915 गणना फॉर्म को डिजिटल किया जा चुका है, जो कि कुल लक्ष्य का लगभग 88.99 फीसदी है। 7 जुलाई को एसआईआर प्रक्रिया समाप्त होने के साथ ही पोलिंग बूथों के पुनर्गठन की प्रक्रिया भी पूरी कर ली जाएगी। मतदाताओं की वास्तविक संख्या के आधार पर पोलिंग बूथों की नई मैपिंग की जा रही है, ताकि भविष्य में मतदान के दौरान किसी भी तरह की अव्यवस्था न हो और बूथों का सही निर्धारण किया जा सके। इस पूरी प्रक्रिया को सुगम बनाने और आम जनता को किसी भी परेशानी से बचाने के लिए निर्वाचन आयोग ने मुस्तैद कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत पूरे प्रदेश में 70 ईआरओ और 800 एईआरओ की तैनाती की गई है। प्रशासन ने साफ किया है कि पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों के मतदाताओं की सुविधा के लिए न्याय पंचायत स्तर पर विशेष कैंप लगाए जाएंगे। वहीं, मैदानी क्षेत्रों के लिए तहसीलों के अलावा नगर निगम, नगर पंक्ति और वार्ड स्तर पर कैंप आयोजित कर आपत्तियों का निपटारा किया जाएगा, ताकि किसी भी पात्र नागरिक का नाम वोटर लिस्ट से गलती से न छूटे और अपात्रों के नाम हटाए जा सकें।
 


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