नीतीश के 'राम' की होगी घर वापसी? 4 साल बाद आरसीपी सिंह की मुख्यमंत्री से आत्मीय मुलाकात, सियासी गलियारों में हलचल तेज
पटना। बिहार की सियासत में शनिवार को उस वक्त एक बड़ा भूचाल आ गया, जब जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और कभी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद रहे रामचंद्र प्रसाद सिंह (आरसीपी सिंह) अचानक नीतीश कुमार से मिलने उनके ७, सर्कुलर रोड स्थित आवास पर पहुंचे। लगभग चार साल के लंबे अंतराल के बाद हुई इस मुलाकात ने राज्य के सियासी तापमान को अचानक बढ़ा दिया है। जैसे ही दोनों नेताओं की मुस्कुराती हुई तस्वीर सामने आई, राजनीतिक गलियारों में आरसीपी सिंह की जदयू में दोबारा एंट्री को लेकर अटकलें बेहद तेज हो गईं।
नीतीश कुमार से मुलाकात के बाद बाहर निकले आरसीपी सिंह के चेहरे पर एक अलग ही संतोष और चमक थी। पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने खुले दिल से कहा, "पूरे ४ साल बाद नीतीश बाबू से मुलाकात हो रही है। यह मुलाकात बेहद आत्मीय और सकारात्मक रही। नीतीश कुमार के राजनीतिक रसूख पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए आरसीपी सिंह ने अपने पुराने नेता का जमकर बचाव किया। उन्होंने विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा, "कुछ लोग नीतीश कुमार को कमजोर समझने की भूल कर रहे हैं, तो मैं उन्हें साफ बता दूं कि वे पूरी तरह गलत हैं। नीतीश कुमार कल भी मजबूत थे और आज भी पूरी तरह से मजबूत हैं।" जब पत्रकारों ने उनसे जदयू में दोबारा शामिल होने का सीधा सवाल पूछा, तो आरसीपी सिंह ने रहस्यमयी मुस्कान के साथ कहा-"बस, सही समय का इंतजार कीजिए। इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री आवास के बाहर भारी राजनीतिक ड्रामा भी देखने को मिला। आरसीपी सिंह के समर्थकों ने आवास के मुख्य गेट पर जमकर हंगामा और नारेबाजी की। समर्थकों का आरोप था कि जदयू के कद्दावर नेता संजय गांधी और ललन सर्राफ जानबूझकर आरसीपी सिंह को मुख्यमंत्री से मिलने से रोक रहे थे।
आक्रोशित समर्थकों ने आरोप लगाया कि, "इन नेताओं को आरसीपी सिंह के कद से डर लगता है, इसीलिए ये लोग अन्याय कर रहे हैं और उन्हें पार्टी के मुखिया से मिलने नहीं देना चाहते।" समर्थकों के इस विरोध प्रदर्शन से कुछ देर के लिए स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। हालांकि, स्थिति को भांपते हुए खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पहल की और आरसीपी सिंह को ससम्मान अंदर बुला लिया। समर्थकों के इस गुस्से पर आरसीपी सिंह ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि समर्थक चाहते थे कि उनके नेता की लंबी बातचीत हो, इसलिए वे थोड़े भावुक और आक्रोशित हो गए थे, लेकिन अब सब ठीक है। राजनीतिक पंडितों और विश्लेषकों का मानना है कि 'नीतीश के राम' कहे जाने वाले आरसीपी सिंह की जदयू में वापसी अब महज एक औपचारिकता रह गई है। हाल के दिनों में आरसीपी सिंह द्वारा लगातार नीतीश कुमार की तारीफ करना इसी बात का संकेत था। दिलचस्प बात यह है कि आरसीपी की वापसी को लेकर इस बार जदयू के भीतर भी माहौल काफी सकारात्मक नजर आ रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और रणनीतिकारों ने उनकी री-एंट्री को हरी झंडी दे दी है। हाल ही में पार्टी के वरिष्ठ विधायक श्याम रजक ने सार्वजनिक मंच से आरसीपी सिंह का स्वागत करते हुए बड़ा बयान दिया था कि, "जदयू आरसीपी सिंह का अपना घर है और वे जब चाहें अपने घर लौट सकते हैं, इसमें किसी को कोई ऐतराज नहीं होगा। आरसीपी सिंह का जदयू में वापस आना बिहार की आगामी राजनीति के समीकरणों को पूरी तरह बदल सकता है। एक कुशल संगठनकर्ता के रूप में पहचाने जाने वाले आरसीपी सिंह अगर फिर से नीतीश कुमार के साथ कदम से कदम मिलाकर चलते हैं, तो इससे जदयू के सांगठनिक ढांचे को भारी मजबूती मिलेगी। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि 'समय का इंतजार' करने की बात कहने वाले आरसीपी सिंह किस दिन आधिकारिक तौर पर तीर को अपने हाथ में थामते हैं।