किच्छा नगर पालिका चुनाव में देरी पर हाईकोर्ट सख्त,डेढ़ साल से प्रशासक के भरोसे चल रही पालिका पर उठे सवाल
नैनीताल। उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले की किच्छा नगर पालिका में चुनाव न कराए जाने का मामला अब न्यायालय की चौखट तक पहुंच गया है। इस मामले में शुक्रवार को उत्तराखंड उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने याचिका पर पक्षों की दलीलें सुनीं। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि किच्छा नगर पालिका में पिछले करीब डेढ़ साल से प्रशासक के माध्यम से ही सभी प्रशासनिक कार्य संचालित किए जा रहे हैं। प्रदेश की अन्य नगर पालिकाओं में चुनाव हो चुके हैं, लेकिन किच्छा नगर पालिका में अब तक चुनाव नहीं कराए गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से आग्रह किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए जल्द से जल्द यहां चुनाव कराए जाएं।
यह याचिका किच्छा निवासी नईमूल हुसैन सहित अन्य लोगों की ओर से दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार ने 14 दिसंबर 2024 को प्रदेश की 43 नगर पालिकाओं के अध्यक्ष पदों के लिए प्रस्तावित आरक्षण की अधिसूचना जारी की थी। इस अधिसूचना में आम जनता से आपत्तियां और सुझाव मांगे गए थे, लेकिन उसमें किच्छा नगर पालिका अध्यक्ष पद के आरक्षण का उल्लेख नहीं किया गया था। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इससे यह आशंका पैदा हुई कि सरकार किच्छा नगर पालिका के चुनाव टालने का प्रयास कर रही है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि आरक्षण आवंटन नियमावली के अनुसार नगर पालिका अध्यक्ष पदों के लिए रोस्टर के आधार पर आरक्षण तय किया जाता है। लेकिन राज्य सरकार ने 43 नगर पालिका अध्यक्ष पदों के आधार पर ही रोस्टर निर्धारित कर दिया, जबकि किच्छा नगर पालिका की स्थिति को लेकर स्पष्टता नहीं दी गई। याचिका में यह भी कहा गया है कि राज्य सरकार ने पहले किच्छा नगर पालिका के कुछ वार्डों को गांवों में शामिल करने का निर्णय लिया था। इस फैसले के खिलाफ मामला अदालत पहुंचा था, जिस पर उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी थी। इसके बाद सरकार ने उन क्षेत्रों को दोबारा नगर पालिका में शामिल कर लिया। हालांकि याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि अब चुनाव प्रक्रिया को टालने की कोशिश की जा रही है, जिससे स्थानीय निकाय में जनप्रतिनिधियों के बजाय प्रशासनिक व्यवस्था ही चलती रहे। याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि पहले की सुनवाई में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को किच्छा नगर पालिका का आरक्षण तय करने का निर्देश दिया था। अब सरकार की ओर से आरक्षण भी तय कर दिया गया है, लेकिन इसके बावजूद चुनाव की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि जब आरक्षण तय हो चुका है, तो चुनाव कराने में देरी का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि सरकार को जल्द चुनाव कराने के निर्देश दिए जाएं, ताकि नगर पालिका में जनप्रतिनिधियों के माध्यम से प्रशासनिक कार्य संचालित हो सकें। किच्छा नगर पालिका में लंबे समय से चुनाव न होने के कारण स्थानीय स्तर पर भी असंतोष की स्थिति बताई जा रही है। लोगों का कहना है कि निर्वाचित प्रतिनिधियों के अभाव में विकास कार्यों की गति प्रभावित हो रही है और जनता की समस्याओं का समाधान भी अपेक्षित तरीके से नहीं हो पा रहा है। फिलहाल मामले की सुनवाई जारी है और अदालत के अगले आदेश पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यदि अदालत सख्त रुख अपनाती है तो किच्छा नगर पालिका में जल्द चुनाव कराने की दिशा में राज्य सरकार को कदम उठाने पड़ सकते हैं।