चारधाम यात्रा 2026 के लिए सख्त सुरक्षा व्यवस्था: 7000 पुलिसकर्मी तैनात, 1260 सीसीटीवी, 15 ड्रोन और एआई निगरानी, डीजीपी ने दिए सख्त निर्देश
देहरादून। उत्तराखंड चारधाम यात्रा 2026 को सुगम, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए पुलिस प्रशासन ने पूरी कमर कस ली है। शुक्रवार 10 अप्रैल 2026 को डीजीपी दीपम सेठ ने उच्च स्तरीय हाई-लेवल बैठक की, जिसमें सुरक्षा, यातायात, भीड़ प्रबंधन, आपदा प्रबंधन और तकनीकी निगरानी की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में कई जिलों के पुलिस कप्तान वर्चुअली शामिल हुए। डीजीपी ने सभी अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। डीजीपी दीपम सेठ ने बताया कि चारधाम यात्रा के सुचारू संचालन के लिए करीब 7000 पुलिसकर्मी 24 घंटे मुस्तैद रहेंगे। यात्रा मार्ग को 16 सुपर जोन और 149 सेक्टर में विभाजित किया गया है। पूरे मार्ग पर 118 पार्किंग स्थल तैयार किए गए हैं। यात्रा की नोडल जिम्मेदारी आईजी गढ़वाल रेंज राजीव स्वरूप को सौंपी गई है। गढ़वाल रेंज कार्यालय में एकीकृत चारधाम यात्रा कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है, जहां से धामों, यात्रा मार्गों और प्रमुख ठहराव स्थलों पर सुरक्षा, यातायात, भीड़ प्रबंधन और आपदा प्रबंधन की 24×7 मॉनिटरिंग की जाएगी।
उच्च अधिकारियों को सौंपी गई निरीक्षण जिम्मेदारी:
श्री गंगोत्री धाम: एडीजी लॉ एंड ऑर्डर वी. मुरुगेशन
श्री बदरीनाथ धाम: एडीजी प्रशासन ए.पी. अंशुमान
हरिद्वार: पुलिस महानिरीक्षक पीएंडएम विम्मी सचदेवा
श्री केदारनाथ धाम: पुलिस महानिरीक्षक साइबर नीलेश आनंद भरणे
श्री यमुनोत्री धाम: पुलिस महानिरीक्षक प्रशिक्षण अनन्त शंकर ताकवाले
ऋषिकेश, लक्ष्मणझूला, मुनिकीरेती: आईजी लॉ एंड ऑर्डर सुनील कुमार मीणा
यात्रा मार्ग पर पैनी नजर रखने के लिए 1260 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनमें चार धामों के परिसर में 92 कैमरे और यात्रा मार्ग पर 1168 कैमरे शामिल हैं। इसके अलावा 15 ड्रोन लगातार हवाई निगरानी करेंगे। आधुनिक तकनीक के साथ मोटरसाइकिल पेट्रोलिंग भी की जाएगी। यात्रियों को ट्रैफिक और मौसम संबंधी अद्यतन जानकारी लाइव मोबाइल अलर्ट के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी। यातायात को सुचारू रखने और जोखिमों को कम करने के लिए पहले ही 52 बॉटल नेक प्वाइंट, 109 लैंडस्लाइड क्षेत्र, 274 दुर्घटना संभावित स्थल और 61 ब्लैक स्पॉट चिह्नित कर लिए गए हैं। इन सभी स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल, चेतावनी बोर्ड और अन्य सुरक्षा उपाय किए जाएंगे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 57 टूरिस्ट पुलिस सहायता केंद्र, 48 हॉल्टिंग पॉइंट्स और 9 ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन सेंटर बनाए गए हैं। आपदा प्रबंधन के लिए 80 स्थानों पर आपदा टीमें, 37 स्थानों पर एसडीआरएफ, 30 स्थानों पर फायर सर्विस टीमें और 32 स्थानों पर जल पुलिस (गोताखोर) तैनात रहेंगी। इसके अलावा एनडीआरएफ की 8 टीमें और 2 सब-टीमें देहरादून, हरिद्वार, उत्तरकाशी, चमोली और रुद्रप्रयाग में रणनीतिक रूप से तैनात रहेंगी। साइबर ठगी की आशंका को देखते हुए ऑनलाइन पंजीकरण और हेली बुकिंग से जुड़ी फर्जी वेबसाइट्स पर सतर्क नजर रखी जाएगी। चारधाम मंदिर परिसरों में मोबाइल फोन और कैमरे के उपयोग पर मानक SOP का सख्ती से पालन किया जाएगा। ब्लॉगर और यूट्यूबरों की गतिविधियों पर भी सतर्क नजर रखी जाएगी। धामों पर निजी ड्रोनों के संचालन पर जारी SOP का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के संचालन से वाहनों की संख्या में भारी वृद्धि की संभावना को देखते हुए प्रभावी ट्रैफिक प्लान तैयार किया गया है। पिछले वर्ष की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए भीड़ नियंत्रण और पंजीकरण की निगरानी पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। डीजीपी दीपम सेठ ने कहा, “चारधाम और हेमकुंड साहिब यात्रा देवभूमि उत्तराखंड के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन हैं। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु यहां आते हैं। उनकी यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उत्तराखंड पुलिस चारधाम यात्रा को सकुशल सम्पन्न कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सभी अधिकारी सुरक्षा, कानून-व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण और आपदा प्रबंधन पर विशेष सतर्कता बरतें, ताकि हर श्रद्धालु अच्छे अनुभव के साथ लौटे।