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खटीमा सुरई वन रेंज में बाघ का हमला, मवेशी चराने गई बुजुर्ग महिला को बनाया निवाला; ग्रामीणों में भारी खौफ

  • Tapas Vishwas
  • April 02, 2026 08:04 AM
Tiger Attacks in Khatima's Surai Forest Range: Elderly Woman Grazing Cattle Falls Prey; Villagers Gripped by Intense Fear

खटीमा। ऊधम सिंह नगर जिले के खटीमा क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष की एक और भयावह घटना सामने आई है। सुरई वन रेंज के बग्गा चौवन इलाके में जंगल में मवेशी चराने गई 71 वर्षीय गोपुली देवी को बाघ ने अपना शिकार बना लिया। बाघ ने महिला को खींचकर झाड़ियों में ले जाकर मार डाला। घटना बुधवार को हुई जब गोपुली देवी अपने पशुओं को चराने जंगल गई थीं। चरवाहों ने जब महिला को बाघ के हमले में घसीटे जाते देखा तो उन्होंने तुरंत शोर मचाया और सूचना दी। स्थानीय ग्रामीणों और वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर शव को बाघ की झाड़ियों से निकाला। मृतका का शव पोस्टमार्टम के लिए खटीमा उपजिला चिकित्सालय भेज दिया गया।

मृतका गोपुली देवी अपने परिवार को चलाने के लिए पशुपालन का काम करती थीं। उन्होंने अपने पीछे दो विवाहित बेटियां और एक अविवाहित बेटा चंदन सिंह दशौनी को रोता-बिलखता छोड़ दिया है। परिवार में कोहराम मचा हुआ है।घटना की सूचना मिलते ही खटीमा उप वन प्रभाग की एसडीओ संचिता वर्मा और सुरई वन रेंज के रेंजर राजेंद्र सिंह मनराल मौके पर पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने घटनास्थल के आसपास गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। एसडीओ संचिता वर्मा ने रेंज के सभी कार्मिकों को अलर्ट मोड पर रहने और लगातार निगरानी रखने के सख्त निर्देश जारी किए हैं। वन विभाग ने मृतका के परिवार को वन अधिनियम के तहत उचित मुआवजा देने की प्रक्रिया भी तेज कर दी है। इस घटना के बाद पूरे इलाके में भारी आक्रोश और खौफ फैल गया है। स्थानीय ग्रामीणों ने वन विभाग से बाघ के आतंक से निजात दिलाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि सुरई वन रेंज में बाघ के हमलों की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे उनकी जान-माल को खतरा बना हुआ है। वन विभाग के अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि बाघ की निगरानी बढ़ाई जाएगी और यदि जरूरी हुआ तो उसे ट्रैक करके सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने की कार्रवाई की जाएगी। वहीं पुलिस की टीम भी मौके पर पहुंची। झंनकईया एसएचओ देवेंद्र गौरव और वन दरोगा राजू दास ने मामले की जांच शुरू कर दी है। यह घटना एक बार फिर उत्तराखंड में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीर समस्या को उजागर करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों के आसपास बसे गांवों में जागरूकता अभियान चलाने और वन्यजीवों के लिए वैकल्पिक आवास विकसित करने की जरूरत है।


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