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उत्तराखण्डः पेंशन पर रोक के खिलाफ राहत! हाईकोर्ट की खंडपीठ ने आदेश पर लगाई रोक, नियमित कर्मचारियों को मिली बड़ी राहत

  • Awaaz Desk
  • February 17, 2026 09:02 AM
Uttarakhand: Relief against pension freeze! High Court division bench stays order, major relief for regular employees

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खण्डपीठ ने लोक निर्माण विभाग व सिंचाई विभाग के नियमित व वर्कचार्ज कर्मचारियों को पेंशन से बाहर किए जाने वाले वित्त विभाग के 16 जनवरी के आदेश पर रोक लगा दी है। इस आदेश में 2016 के बाद नियमित हुए कर्मचारियों की पेंशन पर रोक लगा दी थी साथ ही जिन कर्मचारियों को पेंशन मिल रही थी उनकी पेंशन भी बन्द कर दी गई थी। इस मामले में शीतकालीन अवकाश के दौरान न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की पीठ ने भी कुछ कार्मिकों की याचिका की सुनवाई के बाद वित्त विभाग के 16 जनवरी के आदेश पर रोक लगाई थी। किन्तु वरिष्ठ न्यायधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने विगत दिनों इस आदेश पर रोक नहीं लगाई और सरकार से जबाव मांगा था। इधर सोमवार को सिंचाई विभाग के नियमित वर्कचार्ज कर्मचारी गुलाब सिंह तोमर ने मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता व न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खण्डपीठ में याचिका दायर कर कहा कि 16 जनवरी को वित्त विभाग के कार्यालय आदेश के अनुसार 1 अक्टूबर 2005 के बाद नियमित हुए वर्कचार्ज कर्मचारियों को पेंशन के दायरे से बाहर कर दिया गया। इन कर्मचारियों को 2018 के सुप्रीम कोर्ट के प्रेम सिंह बनाम उत्तर प्रदेश सरकार के मामले में पारित आदेश में वर्कचार्ज सेवा को जोड़ते हुए उन्हें पेंशन समेत अन्य लाभ दिए जाने को कहा गया था। अब शासन की ओर से मनमाना आदेश जारी कर तत्काल प्रभाव से पेंशन बंद कर दी गई। जो कर्मचारी सेवारत हैं उन्हें राष्ट्रीय पेंशन योजना से जोड़ा जाने की बात कही गई है।  इसके अलावा राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2023 में उदयराज सिंह बनाम बिहार राज्य में पारित आदेश को आधार मानकर यह आदेश जारी किया है। उस आदेश में भी सुप्रीम कोर्ट ने बाद में संशोधन कर कहा था कि प्रेम सिंह बनाम उत्तर प्रदेश सरकार से सम्बन्धी आदेश 3 जजों की खण्डपीठ ने दिया था जबकि 2023 में उदयप्रताप बनाम बिहार राज्य वाला आदेश दो जजों की पीठ ने दिया है, इसलिये 2018 में पारित प्रेम सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य सम्बन्धी फैसला ही मान्य है। जिसे सरकार ने नजरअंदाज किया है। इन तर्कों के बाद कोर्ट ने उक्त आदेश पर रोक लगा दी है।


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