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शिक्षा निदेशक मारपीट प्रकरण: विधायक उमेश शर्मा काऊ ने सार्वजनिक रूप से मांगी माफी, बोले- 'नौडियाल मेरे छोटे भाई जैसे, घटना का बेहद अफसोस'

  • Tapas Vishwas
  • February 25, 2026 11:02 AM
Education Director assault case: MLA Umesh Sharma Kau publicly apologized, saying, "Naudiyal is like my younger brother, I deeply regret the incident."

देहरादून। राजधानी के रायपुर स्थित शिक्षा निदेशालय में बीते शनिवार को प्रारंभिक शिक्षा निदेशक अजय नौडियाल के साथ हुई अभद्रता और मारपीट के हाई-प्रोफाइल मामले ने बुधवार को नया मोड़ ले लिया। चौतरफा दबाव और कर्मचारी संगठनों के कड़े विरोध के बीच रायपुर से भाजपा विधायक उमेश शर्मा काऊ ने इस पूरी घटना पर सार्वजनिक रूप से खेद प्रकट करते हुए माफी मांग ली है। हालांकि, दर्ज मुकदमों की वापसी को लेकर अभी भी संशय बरकरार है।

देहरादून भाजपा महानगर कार्यालय में विधायक उमेश शर्मा काऊ ने महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल और अपने सैकड़ों समर्थकों की मौजूदगी में एक लिखित माफीनामा पढ़ा। विधायक ने स्वीकार किया कि 21 फरवरी को निदेशालय में जो कुछ भी हुआ, वह नहीं होना चाहिए था। उन्होंने कहा, "मैं जनहित के मुद्दों को लेकर निदेशालय गया था, लेकिन बातचीत के दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया। जाने-अनजाने में हुई इस घटना पर मुझे बेहद अफसोस है और मैं संबंधित पक्षों से माफी मांगता हूँ। विधायक काऊ ने भावुक कार्ड खेलते हुए प्रारंभिक शिक्षा निदेशक अजय नौडियाल को अपना छोटा भाई बताया। उन्होंने कहा, "नौडियाल मेरे छोटे भाई की तरह हैं। उन्हें जो चोट लगी है, वह मुझे लगी है। मेरा मन बहुत दुखी है। कर्मचारी और अधिकारी मेरा परिवार हैं, उनका अहित हो जाए, ऐसा काऊ कभी सोच भी नहीं सकता।" उन्होंने कर्मचारी-शिक्षक संघ मोर्चा का भी आभार जताया कि उन्होंने इस मामले का राजनीतिकरण नहीं होने दिया।विधायक ने अपने माफीनामे में घटना की वजह भी स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि वह एक ऐसे परिवार के साथ निदेशालय गए थे, जिसने विद्यालय के लिए 1.5 बीघा जमीन दान की थी। उनकी मांग थी कि विद्यालय का नामकरण दानदाता स्व. पदम सिंह रावत के नाम पर किया जाए। विधायक के अनुसार, यह प्रकरण लंबे समय से लंबित था और इसी पर चर्चा के दौरान विवाद बढ़ा। उन्होंने दावा किया कि एक जनप्रतिनिधि होने के नाते उन्होंने विवाद शांत कराने का प्रयास किया था। भले ही विधायक ने नैतिकता के आधार पर माफी मांग ली हो, लेकिन कानूनी कार्रवाई को लेकर उनका रुख अभी भी सख्त है। माफीनामा पढ़ने के बाद जब उनसे सवाल किया गया कि क्या वह दर्ज मुकदमा वापस लेंगे? इस पर उन्होंने स्पष्ट कहा कि कानूनी प्रक्रिया अपने तरीके से चलेगी। काऊ ने तर्क दिया कि मुकदमा दोनों तरफ से दर्ज हुआ है, इसलिए वापसी की प्रक्रिया भी दोनों तरफ से ही होनी चाहिए। गौरतलब है कि इस घटना के बाद से ही राज्य के शिक्षा महकमे और कर्मचारी संगठनों में भारी आक्रोश था। प्रदेश सरकार और भाजपा संगठन पर भी इस मामले को सुलझाने का भारी दबाव था। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा कानून-व्यवस्था को लेकर दिखाई गई गंभीरता के बाद विधायक का यह कदम डैमेज कंट्रोल के रूप में देखा जा रहा है। अब देखना यह होगा कि विधायक की इस माफी के बाद क्या शिक्षा निदेशक और कर्मचारी संगठन अपना रुख नरम करते हैं या कानूनी लड़ाई जारी रहती है।


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