नैनीताल में पारंपरिक जल स्रोतों पर मंथन! विशेषज्ञों ने संरक्षण और विरासत बचाने पर दिया जोर
नैनीताल। भारत और नेपाल के हिमालयी क्षेत्र में पारंपरिक जल व्यवस्था, संरक्षण और इससे जुड़ी जानकारियां पर चर्चा के लिए कुमाऊं विश्व विद्यालय के हर्मिटेज सभागार में एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का आयोजन एमएमटीटीसी द्वारा किया गया, जिसमें अतिथियों ने पारंपरिक जल स्रोतों की उपयोगिता और उनके संरक्षण की आवश्यकता पर अपने विचार रखे। सेमिनार के दौरान चित्रों और प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत और नेपाल के हिमालयी क्षेत्रों में जल संरक्षण की समानताओं को दर्शाया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि नौले और धारे जैसे पारंपरिक जल स्रोत पहाड़ी जीवन का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। इन स्रोतों को भगवान विष्णु से जोड़कर देखा जाता है और ये सदियों से लोगों की जल जरूरतों को पूरा करते आए हैं। हालांकि बदलते समय के साथ इन जल स्रोतों की उपेक्षा, गंदगी और प्राकृतिक कारणों से इनके सूखने का खतरा बढ़ गया है। वक्ताओं ने इस पर चिंता जताते हुए कहा कि पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण न केवल जल संकट का समाधान है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत को बचाने का भी एक अहम कदम है।