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तालिबान का नया दंड संहिता कानूनः पतियों को पत्नी-बच्चों को पीटने की छूट! हड्डी टूटने पर ही सजा का प्रावधान, महिलाओं की सुरक्षा पर गहरा संकट

  • Awaaz Desk
  • February 19, 2026 05:02 AM
The Taliban's new penal code allows husbands to beat their wives and children! Punishment is only for broken bones, posing a serious threat to women's safety.

नई दिल्ली। अफगानिस्तान में तालिबान सरकार ने एक ऐसा फरमान सुनाया है, जिसने न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चिंता पैदा कर दी है, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। यहां लागू किए गए नए दंड संहिता कानून में पतियों को अपनी पत्नियों और बच्चों को शारीरिक रूप से दंडित करने की अनुमति दी गई है, बशर्ते इससे हड्डी टूटने और गहरी चोट न लगे। 90 पन्नों के इस नए कानून को संगठन के सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने साइन किया है। इससे पहले महिलाओं की सुरक्षा के लिए लागू कानूनों को समाप्त कर दिया गया है। नए प्रावधानों के अनुसार अगर पति-पत्नी को गंभीर चोट या फ्रैक्चर पहुंचाता है तो उसे अधिकतम 15 दिन की जेल हो सकती है। सजा तभी संभव है, जब महिला अदालत में हिंसा को साबित कर सके। महिला को पूरी तरह ढंका हुआ रहकर न्यायाधीश के सामने अपने घाव दिखाने होंगे। साथ ही अदालत में उसके साथ उसका पति या कोई पुरुष अभिभावक मौजूद होना अनिवार्य है। यह कानून महिलाओं की आवाजाही पर भी प्रतिबंध लगाता है। अगर कोई विवाहित महिला अपने पति की अनुमति के बिना रिश्तेदारों से मिलने जाती है तो उसे तीन महीने तक की जेल हो सकती है। इस दंड संहिता का अनुच्छेद 9 अफगान समाज को चार वर्गों में बांटता है धार्मिक विद्वान (उलेमा), अभिजात वर्ग (अशरफ), मध्यम वर्ग और निम्न वर्ग इस व्यवस्था में अपराध की प्रकृति या गंभीरता से अधिक आरोपी की सामाजिक स्थिति के आधार पर सजा तय की जाएगी।

धार्मिक विद्वान को लेकर खास नियम
अगर कोई धार्मिक विद्वान अपराध करता है तो उसके लिए केवल सलाह दी जाएगी। अभिजात वर्ग के सदस्य को अदालत में तलब कर सलाह दी जाएगी। मध्यम वर्ग के व्यक्ति को उसी अपराध के लिए कारावास हो सकता है। जबकि निम्न वर्ग के लोगों को जेल के साथ शारीरिक दंड भी दिया जा सकता है। गंभीर अपराधों में शारीरिक दंड इस्लामी धर्मगुरुओं द्वारा दिया जाएगा, न कि सुधार सेवाओं की तरफ से। इस नए कानून ने 2009 में लागू महिलाओं के खिलाफ हिंसा उन्मूलन कानून को समाप्त कर दिया है, जिसे पूर्व सरकार ने अमेरिका के समर्थन से लागू किया था। एक रिपोर्ट के अनुसार मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि लोग इस कानून के खिलाफ बोलने से डर रहे हैं, यहां तक कि गुमनाम रूप से भी, क्योंकि तालिबान ने एक नया आदेश जारी किया है, जिसमें इस कानून पर चर्चा करना भी अपराध माना गया है।

अफगान मानवाधिकार संगठन की अपील
निर्वासन में काम कर रहा अफगान मानवाधिकार संगठन रावदारी ने यूनाईटेड नेशन और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से अपील की है कि वे इस आपराधिक प्रक्रिया संहिता के कार्यान्वयन को तुरंत रोकने के लिए सभी कानूनी उपाय अपनाएं। महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा पर संयुक्त राष्ट्र की विशेष रिपोर्टर रीम अलसलेम ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि इस नए कानून के महिलाओं और लड़कियों पर गंभीर प्रभाव होंगे और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सवाल किया कि क्या वे इस स्थिति में हस्तक्षेप करेंगे।


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