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उत्तराखंड में विकास योजनाओं में ₹180 करोड़ से अधिक की गड़बड़ी, कैग रिपोर्ट में खुलासा, सिस्टम पर खड़े हुए सवाल

  • Tapas Vishwas
  • March 11, 2026 11:03 AM
CAG report reveals irregularities worth over ₹180 crore in Uttarakhand development schemes, raising questions about the system

उत्तराखंड में विभिन्न विकास योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट में वित्तीय वर्ष मार्च 2022 तक की जांच के दौरान करीब 186 करोड़ रुपये की गड़बड़ी सामने आई है। रिपोर्ट में कई योजनाओं में नियमों की अनदेखी, अधूरे कार्यों के बावजूद भुगतान और परियोजनाओं के समय पर पूरा न होने जैसी खामियों की ओर इशारा किया गया है। इससे सरकारी धन के उपयोग और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कैग की रिपोर्ट के अनुसार कई परियोजनाओं में कार्य पूरा हुए बिना ही भुगतान कर दिया गया। जांच में पाया गया कि 98 परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो सकीं, जबकि 31 परियोजनाओं का कार्य शुरू ही नहीं हुआ। इसके बावजूद इन परियोजनाओं के लिए करीब 3.89 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया, जिसे वित्तीय नियमों और प्रक्रियाओं का स्पष्ट उल्लंघन माना गया है। इससे सरकारी धन के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

रिपोर्ट में पर्यटन विभाग की झील विकास योजनाओं में भी कई खामियां सामने आई हैं। ऑडिट के दौरान पाया गया कि भीमताल झील विकास कार्य पर करीब 71.68 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि नैनीताल झील से संबंधित परियोजनाओं पर लगभग 50.33 करोड़ रुपये की लागत आई। हालांकि कई मामलों में गलत स्थान चयन, पर्याप्त योजना के अभाव और कार्यों की धीमी गति के कारण अपेक्षित परिणाम हासिल नहीं हो सके। कैग ने इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन में योजना निर्माण और प्रबंधन की कमियों को प्रमुख कारण बताया है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि कुछ परियोजनाओं में ठेकेदारों को निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना ही भुगतान कर दिया गया। कई मामलों में कार्यों की गुणवत्ता और तय समय सीमा का उचित आकलन नहीं किया गया, जिसके कारण परियोजनाएं लंबित रह गईं और सरकारी धन का प्रभावी उपयोग नहीं हो सका। हरिद्वार में आयोजित कुंभ 2021 से जुड़ी परियोजनाओं में भी वित्तीय अनियमितताओं का जिक्र रिपोर्ट में किया गया है। कैग के अनुसार 13 परियोजनाओं के लिए करीब 36.99 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की गई, लेकिन कई कार्य समय पर पूरे नहीं हो पाए और कुछ परियोजनाएं अधूरी रह गईं। इससे तय उद्देश्यों की पूर्ति भी नहीं हो सकी। इसके अलावा आपदा पुनर्निर्माण से संबंधित परियोजनाओं पर भी सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार कई योजनाओं में धनराशि खर्च होने के बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। कुछ परियोजनाओं में कार्यों के क्रियान्वयन में देरी हुई, जबकि कुछ मामलों में खर्च का सही आकलन और निगरानी नहीं की गई। कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कई विभागों में वित्तीय प्रबंधन और निगरानी तंत्र पर्याप्त प्रभावी नहीं पाया गया। परियोजनाओं के चयन, कार्यान्वयन और भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी दिखाई दी। रिपोर्ट में संबंधित विभागों को सलाह दी गई है कि भविष्य में योजनाओं के संचालन में वित्तीय नियमों का सख्ती से पालन किया जाए और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत बनाया जाए। कैग की इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद प्रदेश में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और सरकारी धन के उपयोग को लेकर नई बहस छिड़ गई है। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है और अब सभी की नजर सरकार की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।


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