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चारधाम यात्रा सुरक्षा चक्र: देहरादून में 'टेबल टॉप' अभ्यास के साथ बनी आपदा प्रबंधन की रणनीति, शुक्रवार को छह जिलों में होगी मॉक ड्रिल

  • Tapas Vishwas
  • April 08, 2026 12:04 PM
Char Dham Yatra Security Shield: Disaster Management Strategy Formulated in Dehradun via 'Table-Top' Exercise; Mock Drills to be Conducted in Six Districts on Friday.

देहरादून। आगामी चारधाम यात्रा को निर्विघ्न, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए उत्तराखंड सरकार और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। बुधवार को देहरादून स्थित राज्य आपदा प्रबंधन केंद्र में एक उच्च स्तरीय 'टेबल टॉप' अभ्यास का आयोजन किया गया। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य यात्रा के दौरान किसी भी संभावित प्राकृतिक या मानव निर्मित आपदा से निपटने के लिए विभिन्न विभागों के बीच तालमेल को परखना और रिस्पांस टाइम को न्यूनतम करना रहा।

अभ्यास के दौरान एनडीएमए के सदस्य कृष्णा वत्स और सचिव मनीष भारद्वाज ने स्पष्ट किया कि इस वर्ष यात्रा का लक्ष्य 'जीरो मोर्टेलिटी' यानी शून्य मृत्यु दर रखा गया है। इसके लिए उन्होंने यात्रियों के मोबाइल में 'सचेत ऐप' अनिवार्य रूप से डाउनलोड कराने के निर्देश दिए हैं, ताकि उन तक रियल-टाइम अलर्ट और मौसम की सटीक जानकारी पहुंचाई जा सके। अधिकारियों ने कहा कि चारधाम यात्रा एक राष्ट्रीय महत्व का आयोजन है, जिसमें सुरक्षा मानकों के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने जानकारी दी कि टेबल टॉप अभ्यास के बाद अब जमीनी स्तर पर तैयारियों को परखने की बारी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर आगामी शुक्रवार को यात्रा मार्ग से जुड़े छह प्रमुख जिलों—उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली (टिहरी), पौड़ी, देहरादून और हरिद्वार में वृहद स्तर पर मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी। इसमें एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन आपदा की स्थिति में त्वरित बचाव कार्य का प्रदर्शन करेंगे। एनडीएमए ने इस बार 'रूट स्पेसिफिक मॉनिटरिंग' और 'माइक्रो लेवल रिस्क असेसमेंट' पर विशेष जोर दिया है। इसका अर्थ है कि यात्रा मार्ग के हर संवेदनशील मोड़ और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों (हॉटस्पॉट्स) की पहचान कर वहां विशेष कार्ययोजना बनाई जाएगी। साथ ही, इम्पैक्ट बेस्ड फोरकास्टिंग के जरिए यह आकलन किया जाएगा कि खराब मौसम का यात्रा के किन हिस्सों पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ सकता है। भीड़ नियंत्रण के लिए रियल टाइम मॉनिटरिंग और मोबाइल हेल्थ यूनिट्स की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। दुर्गम क्षेत्रों में 'कम्युनिकेशन ऑन व्हील्स' तकनीक का उपयोग किया जाएगा ताकि नेटवर्क न होने पर भी संचार व्यवस्था बनी रहे। इसके अलावा, हेली सेवाओं में सुरक्षा मानकों के सख्त पालन और छोटे शहरों में इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर स्थापित करने की रणनीति पर भी चर्चा की गई। यात्रा के दौरान एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें 24 घंटे अलर्ट मोड पर रहेंगी।


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