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उत्तराखंड चारधाम यात्रा: 'सड़कें चकाचक नहीं मिलीं तो खैर नहीं', धामी सरकार की कार्यदायी संस्थाओं को दो-टूक चेतावनी

  • Tapas Vishwas
  • March 27, 2026 11:03 AM
Uttarakhand Char Dham Yatra: 'If Roads Are Not Found in Pristine Condition, There Will Be No Leniency'—Dhami Government Issues Stern Warning to Executing Agencies

देहरादून। उत्तराखंड की विश्वप्रसिद्ध चारधाम यात्रा का आगाज आगामी 19 अप्रैल 2026 से होने जा रहा है। यात्रा को सुगम, सुरक्षित और सुखद बनाने के लिए प्रदेश सरकार इस बार 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर काम कर रही है। शासन ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि यात्रा मार्ग की सड़कों की स्थिति खराब पाई गई या किसी कार्यदायी संस्था की लापरवाही से सरकार की छवि धूमिल हुई, तो संबंधित एजेंसी के खिलाफ न केवल सख्त कार्रवाई होगी, बल्कि मुकदमा भी दर्ज किया जा सकता है। लोक निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पांडेय ने चारधाम यात्रा रूट पर काम कर रही सभी एजेंसिय PWD (NH), NHIDCL और BRO के साथ उच्च स्तरीय बैठक कर सख्त लहजे में निर्देश जारी किए हैं। सचिव ने बताया कि 19 अप्रैल से यात्रा शुरू होनी है, लेकिन श्रद्धालुओं और वीआईपी मूवमेंट को देखते हुए 15 अप्रैल तक सभी सड़कों को पूरी तरह दुरुस्त करने का लक्ष्य दिया गया है।

एजेंसियों को निर्देशित किया गया है कि:
सड़कों का सरफेस पूरी तरह क्लियर और गड्ढा मुक्त होना चाहिए।
मार्ग पर मौजूद छोटे-मोटे स्लाइड (भूस्खलन का मलबा) तत्काल हटाए जाएं।
सड़कों पर पेंटिंग, साइनेज और सुरक्षा बोर्ड लगाने का काम हर हाल में पूरा हो।
प्रत्येक शुक्रवार को प्रगति कार्यों की समीक्षा की जाएगी।

शासन ने इस बार जवाबदेही तय करने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। सचिव पंकज पांडेय के अनुसार, सभी कार्यदायी संस्थाओं को लिखित पत्र जारी कर दिया गया है। उन्होंने कहा, "यदि किसी एजेंसी को केंद्र या राज्य सरकार से मदद चाहिए, तो वे प्राथमिकता पर अपनी बात रखें। लेकिन अगर बिना बताए काम अधूरा छोड़ा गया और सड़कों की बदहाली से सरकार की साख पर आंच आई, तो इसे गंभीर अपराध माना जाएगा। ऐसी स्थिति में संबंधित एजेंसी पर मुकदमा भी चलाया जा सकता है। इस संबंध में उत्तराखंड की मुख्य सचिव ने भारत सरकार के MORTH (सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय) के सेक्रेटरी को भी पत्र लिखकर यात्रा की संवेदनशीलता से अवगत कराया है। साथ ही DG BRO और PWD के आला अधिकारियों को भी जिम्मेदारी तय करने की चिट्ठी भेजी गई है। चारधाम यात्रा के दौरान ऋषिकेश में लगने वाला भारी जाम हमेशा से यात्रियों और स्थानीय प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती रहा है। इस समस्या के स्थाई समाधान के लिए शासन ने ऋषिकेश बाईपास परियोजना पर काम तेज कर दिया है। लोक निर्माण विभाग की नेशनल हाईवे शाखा ने इस बाईपास का एलाइनमेंट फाइनल कर लिया है। सचिव PWD ने जानकारी दी कि इसकी डीपीआर (DPR) तैयार हो चुकी है और वन भूमि हस्तांतरण (Forest Transfer) व भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। भारत सरकार के स्तर पर इसकी स्वीकृति के लिए महत्वपूर्ण बैठकें जारी हैं। ऋषिकेश बाईपास बनने के बाद चारधाम जाने वाले यात्रियों को घंटों लंबे जाम से नहीं जूझना पड़ेगा, जिससे यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। चारधाम यात्रा उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था और पहचान की रीढ़ है। यात्रा का फीडबैक सीधे तौर पर राज्य सरकार की कार्यप्रणाली को दर्शाता है। यही कारण है कि इस बार शासन जनवरी माह से ही लगातार मॉनिटरिंग कर रहा है। हालिया विधानसभा सत्र में भी यात्रा रूट की खामियों का मुद्दा गूंजा था, जिसके बाद शासन ने अब फील्ड पर काम करने वाली एजेंसियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।


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