विश्व हिंदी सम्मेलन में उत्तराखंड की गूंज: मॉरीशस में डॉ. राधा वाल्मीकि को दो अंतर्राष्ट्रीय सम्मानों से नवाजा गया
मॉरीशस में आयोजित विश्व हिंदी सम्मेलन का अंतर्राष्ट्रीय मंच इस बार उत्तराखंड की वरिष्ठ साहित्यकार, समाजसेविका और सेवानिवृत्त प्रवक्ता डॉ. राधा वाल्मीकि के व्यक्तित्व, कृतित्व और ओजस्वी वाणी का साक्षी बना। विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन में डॉ. राधा वाल्मीकि की उपस्थिति न केवल साहित्यिक दृष्टि से उल्लेखनीय रही, बल्कि हिंदी भाषा, भारतीय संस्कृति और सामाजिक चेतना के वैश्विक प्रसार का सशक्त संदेश भी लेकर आई। विश्व हिंदी सचिवालय, मॉरीशस के सभागार में जब डॉ. राधा वाल्मीकि ने अपनी रचनाओं का पाठ किया, तो वह केवल कविता या विचारों की प्रस्तुति नहीं थी, बल्कि हिंदी के प्रति अगाध प्रेम, सामाजिक न्याय, समानता और राष्ट्रबोध का ओजस्वी उद्घोष था। उनकी वाणी में अनुभव की गंभीरता, शब्दों में दृढ़ता और भावाभिव्यक्ति में आत्मीयता स्पष्ट झलक रही थी। जैसे ही उन्होंने अपनी रचना का वाचन समाप्त किया, पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। यह क्षण इस बात का प्रमाण था कि उनकी प्रस्तुति सम्मेलन की सबसे प्रभावशाली प्रस्तुतियों में से एक रही।
इस विश्व हिंदी सम्मेलन में भारत सहित विश्व के लगभग 12 देशों के हिंदी साहित्यकार, विद्वान और विचारक शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में हिंदी को संयुक्त राष्ट्र संघ की आधिकारिक भाषा बनाए जाने की पुरजोर मांग की। डॉ. राधा वाल्मीकि की काव्य रचना “भारतीय संस्कृति और आधुनिक भारत” तथा शोध-आलेख “वैश्विक पटल पर हिंदी और भारतीय संस्कृति” ने इस अभियान को वैचारिक ऊर्जा प्रदान की और हिंदी के वैश्विक अभियान को नई दिशा दी।9 और 10 जनवरी 2026 को आयोजित इस दो दिवसीय सेमिनार एवं कवि सम्मेलन में मॉरीशस गणराज्य के महामहिम राष्ट्रपति श्री धरमबीर गोखूल जी.सी.एस.के., भारतीय उप उच्चायुक्त श्रीमती अपर्णा गणेशन, विश्व हिंदी सचिवालय की महासचिव डॉ. माधुरी रामधारी सहित अनेक गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन की शोभा बढ़ाई। इसी मंच पर डॉ. राधा वाल्मीकि को “विश्व हिंदी गौरव सम्मान 2026” से सम्मानित किया गया।इसके बाद 12 जनवरी 2026 को विश्व हिंदी प्रचारिणी महासभा के सभागार में आयोजित शोध-पत्र वाचन कार्यक्रम में उन्हें अपने विचार प्रस्तुत करने का अवसर मिला। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मॉरीशस के शिक्षा एवं मानव संसाधन मंत्री श्री महेंद्र गंगा प्रसाद ने हिंदी को विश्व एकता, संस्कृति और संवाद की भाषा बताते हुए ऐसे सम्मेलनों को समय की आवश्यकता बताया। इसी अवसर पर डॉ. राधा वाल्मीकि को उनके कर कमलों से “विश्व हिंदी सेतु सम्मान 2026” प्रदान किया गया। साथ ही साहित्य संचय शोध संवाद फाउंडेशन, दिल्ली के अध्यक्ष मनोज कुमार द्वारा उन्हें प्रमाण पत्र एवं प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।13 जनवरी को मॉरीशस के एक आश्रम में आयोजित सांस्कृतिक संध्या में भी वृहद पुरोहित संघ द्वारा डॉ. राधा वाल्मीकि को सम्मान पत्र और प्रतीक चिन्ह प्रदान किए गए।मॉरीशस के वैश्विक मंचों पर डॉ. राधा वाल्मीकि की सशक्त उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि उत्तराखंड की धरती न केवल प्राकृतिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध है, बल्कि साहित्यिक और बौद्धिक दृष्टि से भी अत्यंत सशक्त है। यह उपलब्धि न केवल जनपद ऊधमसिंह नगर बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए गौरव का विषय है। डॉ. राधा वाल्मीकि की यह सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है कि संकल्प, साधना और अपनी मातृभाषा के प्रति प्रेम से वैश्विक मंच पर भी पहचान बनाई जा सकती है।