उत्तराखंड में एसआईआर के लिए हर बूथ पर तैनात होंगे आईटी वॉलंटियर,आसान होगा बीएलओ का काम
देहरादून। उत्तराखंड में आगामी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को सफल और पारदर्शी बनाने के लिए तैयारियां तेज कर दी गई हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय उत्तराखंड ने बड़ा फैसला लेते हुए प्रदेश के हर बूथ पर आईटी वॉलंटियर तैनात करने का निर्णय लिया है। इन वॉलंटियर की मदद से बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) का कार्यभार कम होगा और पूरी प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
जानकारी के अनुसार,अप्रैल माह में प्रस्तावित एसआईआर से पहले प्री-एसआईआर के तहत मतदाता सूची की मैपिंग का कार्य तेजी से चल रहा है। हालांकि देहरादून, उधमसिंह नगर और नैनीताल जिलों में मैपिंग की प्रगति अपेक्षाकृत धीमी बताई जा रही है, जिस पर अब विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि इस महीने के अंत तक शत-प्रतिशत मैपिंग का लक्ष्य पूरा किया जाए। इस संबंध में मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने सचिवालय में समीक्षा बैठक कर तैयारियों का जायजा लिया। बैठक में नोडल अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा करते हुए उन्होंने गढ़वाल और कुमाऊं मंडलों के आयुक्तों को मैपिंग कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि प्रदेश के सभी 11,733 बूथों पर आईटी वॉलंटियर तैनात किए जाएंगे। ये वॉलंटियर बीएलओ को गणना प्रपत्र के डिजिटलीकरण में सहयोग करेंगे। इसके साथ ही वे घर-घर जाकर फॉर्म वितरण और संग्रहण में भी मदद करेंगे, जिससे कार्य समयबद्ध और सुव्यवस्थित ढंग से पूरा हो सके। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य बीएलओ पर पड़ने वाले अतिरिक्त कार्यभार को कम करना और तकनीक के माध्यम से प्रक्रिया को सरल बनाना है। इसके लिए अपर सचिव ग्राम्य विकास और निदेशक शहरी विकास विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि तकनीकी रूप से दक्ष युवाओं को जल्द से जल्द इस अभियान में शामिल किया जाए। गौरतलब है कि एसआईआर के तहत मतदाता सूची को अद्यतन और त्रुटिरहित बनाया जाता है। इसी क्रम में प्री-एसआईआर के तहत वर्ष 2025 की मतदाता सूची का वर्ष 2003 की सूची से मिलान किया जा रहा है। अब तक लगभग 87 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं की मैपिंग पूरी की जा चुकी है। अधिकारियों का मानना है कि आईटी वॉलंटियर की तैनाती से न केवल कार्य में तेजी आएगी, बल्कि पारदर्शिता भी बढ़ेगी। इससे किसी भी प्रकार की त्रुटि या गड़बड़ी को समय रहते सुधारा जा सकेगा। कुल मिलाकर, उत्तराखंड में एसआईआर को लेकर प्रशासन पूरी तरह सक्रिय है और तकनीकी सहयोग के जरिए मतदाता सूची को अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।