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हाईकोर्ट का अहम निर्णयः जीबी पंत यूनिवर्सिटी में चार्जशीट पर लगी रोक! कहा- केवल बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट ही कर सकता है कार्रवाई, कुलपति का आदेश अमान्य

  • Awaaz Desk
  • March 21, 2026 08:03 AM
The High Court's important decision: GB Pant University's chargesheet has been stayed! It states that only the Board of Management can take action, and the Vice-Chancellor's order is invalid.

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर से जुड़े एक अहम मामले में महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए स्पष्ट किया है कि किसी प्रोफेसर के खिलाफ चार्जशीट जारी करने का अधिकार कुलपति को नहीं है। अदालत ने विश्वविद्यालय को विवादित चार्जशीट तत्काल प्रभाव से वापस लेने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान दिया।

मामले में प्रोफेसर शिवेंद्र कुमार कश्यप ने 5 फरवरी 2026 को जारी चार्जशीट और उससे संबंधित विभागीय अनुशासनात्मक जांच को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता विश्वविद्यालय में कृषि संचार के प्रोफेसर होने के साथ-साथ डीएसटी-टीईसी (टेक्नोलॉजी एनेबलिंग सेंटर) के समन्वयक भी हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विपुल शर्मा ने दलील दी कि  Uttarakhand Government Servant Discipline and Appeal Rules 2003 के नियम 6 के अनुसार, केवल नियुक्ति प्राधिकारी ही अनुशासनात्मक प्राधिकारी होता है और वही चार्जशीट जारी करने के लिए अधिकृत होता है। उन्होंने कहा कि इस मामले में चार्जशीट मुख्य कार्मिक अधिकारी द्वारा कुलपति के नाम से जारी की गई, जो नियमों के विरुद्ध है।

सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय की ओर से भी यह स्वीकार किया गया कि याचिकाकर्ता का नियुक्ति प्राधिकारी ‘बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट’ है, न कि कुलपति। साथ ही यह भी माना गया कि चार्जशीट सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी नहीं की गई थी। विश्वविद्यालय ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि विवादित चार्जशीट तुरंत वापस ले ली जाएगी और भविष्य में यदि कोई नई चार्जशीट जारी की जाती है, तो वह विधि के अनुसार केवल सक्षम प्राधिकारी द्वारा ही जारी की जाएगी। खंडपीठ ने विश्वविद्यालय के इस बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए स्पष्ट निर्देश दिया कि वर्तमान चार्जशीट तत्काल वापस ली जाए। साथ ही यह भी कहा कि भविष्य में जारी होने वाली किसी भी नई चार्जशीट को याचिकाकर्ता द्वारा चुनौती देने का अधिकार सुरक्षित रहेगा।


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