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कुमाऊंनी होली के रंग में रंगे विदेशी मेहमान! नैना देवी मंदिर में होली महोत्सव के दौरान ऑस्ट्रेलियाई पर्यटकों ने जमकर लिया आनंद

  • Tapas Vishwas
  • February 28, 2026 09:02 AM
Foreign visitors soaked in the colors of Kumaoni Holi! Australian tourists thoroughly enjoyed the Holi festival at Naina Devi Temple.

नैनीताल। देवभूमि उत्तराखंड में होली की खुमारी इस बार कुछ खास नजर आ रही है। रंगों का मुख्य पर्व भले ही 4 मार्च को हो, लेकिन पहाड़ों में अभी से बैठकी और खड़ी होली की स्वर लहरियां गूंजने लगी हैं। झीलों की नगरी नैनीताल में स्थित आस्था के केंद्र नैना देवी मंदिर में चल रहे होली महोत्सव ने इस बार विदेशी मेहमानों को भी अपनी संस्कृति के रंग में रंग दिया। मंदिर परिसर में आयोजित पारंपरिक कुमाऊंनी होली के कार्यक्रम में ऑस्ट्रेलिया से आए पर्यटक भी शामिल हुए और ढोलक की थाप, हारमोनियम की धुन और राग आधारित होली गीतों पर झूमते नजर आए। मंदिर में गूंजते “बैठकी होली” के शास्त्रीय रंग और “खड़ी होली” की लोकधुनों ने विदेशी पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

दरअसल, ऑस्ट्रेलिया से नैनीताल घूमने आए इन पर्यटकों को पहले कुमाऊं की पारंपरिक होली के बारे में अधिक जानकारी नहीं थी। शहर भ्रमण के दौरान जब वे नैना देवी मंदिर पहुंचे तो वहां चल रहे होली महोत्सव को देखकर ठिठक गए। श्रद्धा, संगीत और लोक परंपरा से सजे इस आयोजन ने उन्हें इतना प्रभावित किया कि वे कार्यक्रम का हिस्सा बन गए। ऑस्ट्रेलिया से आई पर्यटक डोरीन कुमर ने बताया कि यह उनके जीवन की पहली होली है और वह इसे कभी नहीं भूल पाएंगी। उन्होंने कहा कि कुमाऊंनी होली में जिस तरह शास्त्रीय संगीत और भक्ति का समावेश है, वह बेहद अनोखा है। उन्होंने अपने परिवार के साथ बैठकर होली गीतों का आनंद लिया और स्थानीय लोगों के साथ रंगोत्सव की भावनाओं को साझा किया। मारियन चैन ने इसे जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि यहां लोगों का अपनापन और स्वागत करने की भावना ने उन्हें खास तौर पर प्रभावित किया। उनके अनुसार, होली केवल रंगों का त्योहार नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। पहली बार भारत आईं पर्यटक शेरी ने कहा कि नैनीताल में उन्होंने प्रकृति और संस्कृति का अद्भुत संगम देखा। झीलों और पहाड़ों की खूबसूरती के बीच मनाया जा रहा यह उत्सव उनके लिए किसी सपने जैसा था। उन्होंने कहा कि यहां की होली में आध्यात्मिकता और लोक संस्कृति का जो सुंदर समन्वय है, वह दुनिया में कहीं और देखने को नहीं मिलता। स्थानीय आयोजकों का कहना है कि कुमाऊं की पारंपरिक होली अब अंतरराष्ट्रीय पहचान बना रही है। हर वर्ष बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक इस दौरान नैनीताल पहुंचते हैं और लोक संस्कृति से रूबरू होते हैं। देवभूमि की फिजाओं में गूंजते होली के सुर इस बात का प्रमाण हैं कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत सीमाओं से परे जाकर विश्व भर के लोगों को जोड़ रही है। इस बार नैना देवी मंदिर का होली महोत्सव विदेशी मेहमानों की मौजूदगी से और भी यादगार बन गया।


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