हरिद्वार में मिड-डे मील पर 'ताला': उधार के चावल से बुझ रही बच्चों की भूख, कई स्कूलों में चूल्हा ठंडा
हरिद्वार। हरिद्वार जनपद के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील योजना एक बार फिर गंभीर संकट में फंस गई है। कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों के लिए दोपहर का पौष्टिक भोजन बनाने के लिए चावल नहीं पहुंच पा रहा है। हालात इतने खराब हो गए हैं कि कई स्कूलों में प्रधानाध्यापक उधार के चावल से भोजन बना रहे हैं, जबकि कुछ विद्यालयों में चावल पूरी तरह खत्म होने के कारण मिड-डे मील बंद करना पड़ गया है। पिछले कई महीनों से चावल की आपूर्ति प्रभावित चल रही है। इससे स्कूलों पर उधार का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रधानाध्यापकों का कहना है कि स्थानीय राशन डीलरों से उधार लेकर बच्चों को भोजन परोस रहे हैं, लेकिन समय पर भुगतान न होने से डीलर अब और चावल देने को तैयार नहीं हैं।
स्थिति कितनी गंभीर है?
राजकीय प्राथमिक विद्यालय ब्रह्मपुरी में 5 क्विंटल चावल की जरूरत है, जिसमें से 3 क्विंटल पहले ही उधार लिया जा चुका है।
राजकीय प्राथमिक विद्यालय सोहलपुर में 6 क्विंटल उधार चावल लिया गया, लेकिन करीब एक माह से मिड-डे मील बाधित है।
राजकीय प्राथमिक विद्यालय रावली महदूद नंबर-1 में 17 क्विंटल चावल उधार में लिया गया है। 25 क्विंटल चावल की मांग की गई है।
राजकीय प्राथमिक विद्यालय हरसीवाला और जूनियर हाई स्कूल झबरी में भी उधार के चावल से ही भोजन बनाया जा रहा है।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों से कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान अभी तक नहीं निकला है। इससे बच्चों के पोषण स्तर पर सीधा असर पड़ रहा है। उप संभागीय विपणन अधिकारी प्रमोद सती ने कहा कि सरकारी चावल की कोई कमी नहीं है। अप्रैल महीने का चावल स्कूलों के लिए आवंटित भी कर दिया गया है। वहीं जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा) अमित कुमार चंद ने स्वीकार किया कि पूर्व में कुछ गड़बड़ियों के कारण वितरण प्रभावित हुआ था, लेकिन जल्द ही समस्या का समाधान कर लिया जाएगा और स्कूलों में नियमित चावल पहुंचना शुरू हो जाएगा। मिड-डे मील योजना का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है। यदि समय रहते इस संकट का समाधान नहीं किया गया तो न सिर्फ बच्चों का स्वास्थ्य प्रभावित होगा, बल्कि स्कूलों में उपस्थिति भी घट सकती है। अभिभावक और शिक्षक अब जल्द से जल्द समस्या के समाधान की मांग कर रहे हैं।