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सरसंघचालक मोहन भागवत का संदेश: भारत अब नहीं बंटेगा, जनसंख्या नीति और यूसीसी पर रखे स्पष्ट विचार

  • Tapas Vishwas
  • February 23, 2026 11:02 AM
Message from Sarsanghchalak Mohan Bhagwat: India will not be divided now, clear views on population policy and UCC

देहरादून। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा है कि देश में अब कटने और बंटने के दिन बीत चुके हैं और 1947 जैसी विभाजन की त्रासदी दोबारा नहीं दोहराई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि समाज और राष्ट्र दोनों अब जागृत हैं तथा किसी भी परिस्थिति में देश का पुनः बंटवारा नहीं होने दिया जाएगा।

हिमालयन कल्चरल सेंटर में आयोजित ‘संघ यात्रा-नये क्षितिज, नये आयाम’ विषयक प्रमुख जन गोष्ठी को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि आज संपूर्ण विश्व भारत को नेतृत्वकारी भूमिका में देख रहा है। उन्होंने एकता को राष्ट्रशक्ति का मूल आधार बताते हुए जनसंख्या नीति, डेमोग्राफिक बदलाव और आरक्षण व्यवस्था जैसे विषयों पर विस्तार से विचार रखे। जनसंख्या कानून की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने तीन बच्चों की नीति का समर्थन किया। साथ ही उत्तराखंड में लागू समान नागरिक संहिता (UCC) की पहल की सराहना करते हुए इसे समाज को जोड़ने वाला कदम बताया और इसे पूरे देश में लागू करने का समर्थन किया। आरक्षण के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था सामाजिक बराबरी के लिए लाई गई थी और जब तक समाज के मन से भेदभाव समाप्त नहीं होता, तब तक आरक्षण की आवश्यकता बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि हजारों वर्षों की सामाजिक विषमता का समाधान केवल कानून से नहीं, बल्कि सामाजिक सद्भाव और व्यवहार में परिवर्तन से संभव है।महिलाओं की भूमिका पर बोलते हुए भागवत ने कहा कि महिलाएं समाज की आधी शक्ति हैं, इसलिए उन्हें 33 प्रतिशत नहीं बल्कि 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। शिक्षा नीति पर उन्होंने संस्कारयुक्त शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का आधार बताया और भविष्य में आवश्यक बदलाव की संभावना जताई। सामाजिक मुद्दों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि ‘लिव-इन’ जैसे संबंध भारतीय समाज की परंपराओं के अनुरूप नहीं हैं और युवाओं को विवाह जैसी सामाजिक जिम्मेदारी को समझना चाहिए। भ्रष्टाचार को उन्होंने मन का संस्कार बताते हुए कहा कि शासन और प्रशासन में आचरण सर्वोपरि होना चाहिए। नई पीढ़ी के संदर्भ में उन्होंने कहा कि जेन-जी के सामने दंभ नहीं, बल्कि प्रामाणिकता से प्रस्तुत होना होगा। तकनीक के उपयोग में संतुलन और घरों में स्क्रीन टाइम सीमित रखने का भी उन्होंने आह्वान किया। भागवत का यह संबोधन सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर व्यापक संदेश देने वाला माना जा रहा है।


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