देवभूमि में अपराधियों पर ऑपरेशन प्रहार: सीएम धामी का सख्त रुख, कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों की अब खैर नहीं
देहरादून। राजधानी देहरादून में हाल ही में हुई आपराधिक घटनाओं और पूर्व ब्रिगेडियर की हत्या के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि उत्तराखंड की शांत वादियों में अपराधियों और हुड़दंगियों के लिए कोई जगह नहीं है। पुलिस मुख्यालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान सीएम धामी ने प्रदेशभर में 'ऑपरेशन प्रहार' चलाने के निर्देश दिए हैं, जिसके तहत अवांछित तत्वों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री के कड़े तेवरों का असर बैठक से पहले ही दिखने लगा। देहरादून में पूर्व ब्रिगेडियर की हत्या के मामले में ड्यूटी में लापरवाही बरतने पर कुठालगेट चौकी प्रभारी अशोक कुमार और उप आबकारी निरीक्षक सोबन सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। सीएम ने साफ चेतावनी दी है कि जनता की सुरक्षा में चूक करने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। बैठक में सीएम ने पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ को निर्देश दिए कि निर्धारित समय के बाद संचालित हो रहे बार और पब्स पर कठोरता बरती जाए। रोड रेज, अवैध फायरिंग और देर रात होने वाली संदिग्ध गतिविधियों पर पूर्ण अंकुश लगाने के लिए राज्यव्यापी चेकिंग अभियान शुरू करने को कहा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा, "कानून-व्यवस्था हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और इससे किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा।"
आला अधिकारियों की जवाबदेही तय
मुख्यमंत्री ने पुलिस के शीर्ष अधिकारियों को सीधे मोर्चे पर तैनात किया है:
आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप को देहरादून की कानून-व्यवस्था की दैनिक मॉनिटरिंग का जिम्मा सौंपा गया है।
एसएसपी देहरादून प्रमेंद्र डोबाल को फील्ड पुलिसिंग और मातहतों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
STF की विशेष टीम (नीलेश आनन्द भरणे और अजय सिंह) को सक्रिय अपराधियों के खिलाफ विशेष अभियान चलाने की जिम्मेदारी दी गई है।
अब देहरादून और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में क्षेत्राधिकारी और थाना प्रभारी स्वयं फील्ड में मौजूद रहेंगे। विशेष रूप से सुबह के समय पुलिस की मौजूदगी बढ़ाई जाएगी। इसके साथ ही पीजी, किरायेदारों और होम-स्टे का सघन सत्यापन अभियान भी चलाया जाएगा ताकि बाहरी और अवांछित तत्वों की पहचान की जा सके। शासन के इन कड़े निर्देशों से स्पष्ट है कि सरकार अब 'एक्शन मोड' में है और देवभूमि की सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जाएगी।