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कानपुर किडनी कांडः चार मंजिला अस्पताल में चलता रहा अवैध ट्रांसप्लांट का खेल! डॉक्टर दंपति गिरफ्तार, उत्तराखंड के युवक के साथ करोड़ों का धोखा उजागर

  • Awaaz Desk
  • April 01, 2026 09:04 AM
Kanpur Kidney Scandal: Illegal transplants continue in a four-story hospital! Doctor couple arrested; Uttarakhand youth duped of crores of rupees exposed

कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां इलाज के नाम पर इंसानियत का सौदा किया जा रहा था। रावतपुर इलाके का एक चार मंजिला अस्पताल, जो कभी मरीजों और डॉक्टरों की भीड़ से गुलजार रहता था, अब वीरान पड़ा है। आरोप है कि इसी अस्पताल में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट का बड़ा खेल चल रहा था। पुलिस ने इस मामले में अस्पताल संचालक डॉक्टर दंपति प्रीति आहूजा और सुरजीत सिंह आहूजा को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि इनके अस्पताल में बिना अनुमति के किडनी ट्रांसप्लांट किए जाते थे और इसके बदले मोटी रकम वसूली जाती थी। जांच में सामने आया है कि एक किडनी ट्रांसप्लांट के लिए 3.5 से 4 लाख रुपये तक ऑपरेशन फीस ली जाती थी, जबकि डोनर और रिसीवर के बीच अलग से करोड़ों का सौदा होता था। यह पूरा नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था। इस रैकेट का एक अहम किरदार शिवम अग्रवाल बताया जा रहा है, जो गरीब और जरूरतमंद लोगों को पैसों का लालच देकर इस जाल में फंसाता था। वह डोनर ढूंढता और उन्हें झूठी कहानियां सुनाकर किडनी देने के लिए तैयार करता था। सबसे दर्दनाक कहानी उत्तराखंड के एक युवक की है, जिसे 10 लाख रुपये का लालच देकर किडनी देने के लिए तैयार किया गया। लेकिन ऑपरेशन के बाद उसे सिर्फ 6 लाख नकद और 3.5 लाख का चेक दिया गया, जबकि उसकी किडनी को एक महिला के परिवार को 90 लाख रुपये से ज्यादा में बेच दिया गया। ऑपरेशन के बाद डोनर और रिसीवर को अलग-अलग जगहों पर शिफ्ट कर दिया जाता था, ताकि किसी भी जांच में सीधा लिंक न मिल सके। यहां तक कि डोनर की पहचान भी बदल दी जाती थी, जिससे पूरा नेटवर्क लंबे समय तक छुपा रहे। 
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ, जब एक डोनर को तय रकम नहीं मिली और उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस और क्राइम ब्रांच ने कई अस्पतालों में एक साथ छापेमारी की। छापेमारी के दौरान प्रिया हॉस्पिटल एंड ट्रामा सेंटर, आहूजा हॉस्पिटल और मेडलाइफ हॉस्पिटल से कई अहम दस्तावेज और सबूत बरामद किए गए। कई लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। जांच में यह भी सामने आया है कि इस रैकेट का जाल छात्रों तक फैला हुआ था। एक एमबीए छात्र और एक छात्रा को भी पैसे का लालच देकर किडनी डोनेट करवाने की बात सामने आई है। कानपुर का यह मामला सिर्फ एक अस्पताल का नहीं, बल्कि उस सिस्टम पर बड़ा सवाल है, जहां इलाज के नाम पर इंसानियत की खरीद-फरोख्त हो रही है। अब देखना यह होगा कि इस किडनी रैकेट के पीछे छिपे पूरे नेटवर्क का कब तक पर्दाफाश हो पाता है और दोषियों को सजा मिलती है या नहीं।

 


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