कैबिनेट विस्तार के बाद नए मंत्रियों की प्राथमिकताएं तय, एक साल में योजनाओं को धरातल पर उतारने की चुनौती
देहरादून। उत्तराखंड में हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद नई सियासी और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पांच नए मंत्रियों को विभागों की जिम्मेदारी सौंपने के साथ ही कुछ पुराने मंत्रियों के विभागों में भी फेरबदल किया है। इस बदलाव के बाद अब नए मंत्रियों ने अपनी प्राथमिकताएं तय कर ली हैं और सरकार की योजनाओं को तेजी से धरातल पर उतारने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। मंत्रिमंडल विस्तार में कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत से स्वास्थ्य विभाग वापस ले लिया गया, जबकि सतपाल महाराज से पंचायतीराज और जलागम, सुबोध उनियाल से तकनीकी शिक्षा और भाषा तथा गणेश जोशी से ग्राम्य विकास विभाग हटाया गया। वहीं, कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या और सौरभ बहुगुणा के विभागों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। राज्य सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती अब आगामी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले अपनी योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करने की है। मंत्रियों के पास लगभग एक वर्ष का ही समय बचा है, ऐसे में उनकी कार्यशैली और परिणाम ही सरकार की छवि तय करेंगे।
नव नियुक्त कैबिनेट मंत्री भरत सिंह चौधरी ने ग्राम्य विकास विभाग की जिम्मेदारी संभालते हुए कहा कि युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ना उनकी प्राथमिकता होगी। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा संचालित स्वरोजगार योजनाओं में तेजी लाकर अधिक से अधिक लोगों को आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। “लखपति दीदी” योजना को शत-प्रतिशत लक्ष्य तक पहुंचाने और महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की ब्रांडिंग, मार्केटिंग व पैकेजिंग को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसके अलावा पर्वतीय क्षेत्रों में स्थानीय उत्पादों पर आधारित एमएसएमई उद्योगों को बढ़ावा देकर रोजगार के नए अवसर सृजित किए जाएंगे।
कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए कहा कि पंचायतों को सशक्त बनाना और गांवों को पुनर्जीवित करना उनका मुख्य लक्ष्य होगा। उन्होंने कहा कि पंचायतों को 29 विषयों का हस्तांतरण, पंचायत भवनों का निर्माण और उनकी वित्तीय सहायता बढ़ाने जैसे कदम उठाए जाएंगे। साथ ही पलायन से खाली हो चुके गांवों को दोबारा आबाद करने के लिए विशेष योजनाएं बनाई जाएंगी। उन्होंने आपदा प्रबंधन, आयुष और जनगणना जैसे विषयों में भी जनहित को सर्वोपरि रखने की बात कही।
परिवहन, सूचना प्रौद्योगिकी और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे मंत्री प्रदीप बत्रा ने कहा कि उनकी प्राथमिकता योजनाओं का लाभ सीधे आम जनता तक पहुंचाना होगा। उन्होंने परिवहन निगम को मजबूत करने, कर्मचारियों को समय पर वेतन देने और बस सेवाओं का विस्तार उन क्षेत्रों तक करने पर जोर दिया, जहां अभी तक सुविधाएं नहीं पहुंच पाई हैं। इसके साथ ही आईटी और जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी जनहित के अनुरूप कार्य किए जाएंगे।
समाज कल्याण विभाग संभाल रहे खजान दास ने विभागीय पारदर्शिता को अपनी प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्र व्यक्तियों तक पहुंचे। साथ ही विभाग में बार-बार सामने आने वाली अनियमितताओं और शिकायतों की जांच कर सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
वहीं, पर्यावरण संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन और शहरी विकास विभाग के मंत्री राम सिंह कैड़ा ने पहाड़ों में सूखते जलस्रोतों को बड़ी चुनौती बताते हुए जल संरक्षण को प्राथमिकता में रखा है। उन्होंने कहा कि नौले, धारे और पारंपरिक जलस्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसके साथ ही वर्षा जल संचयन, चाल-खाल निर्माण और व्यापक पौधरोपण अभियान को भी गति दी जाएगी। शहरी विकास योजनाओं को भी तेजी से लागू करने का आश्वासन दिया गया है। कुल मिलाकर, कैबिनेट विस्तार के बाद सरकार के सामने एक तरफ नई ऊर्जा के साथ काम करने का अवसर है, तो दूसरी ओर कम समय में बेहतर परिणाम देने की चुनौती भी है। अब देखना यह होगा कि नए मंत्री अपनी प्राथमिकताओं को किस हद तक अमल में ला पाते हैं और सरकार की योजनाओं को जमीन पर उतारने में कितनी सफलता हासिल करते हैं। आगामी एक वर्ष राज्य की राजनीति और विकास दोनों दृष्टियों से बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाला है।