उत्तराखण्डः देहरादून के सिटी सेंटर मॉल के बाहर गोलियों से छलनी झारखंड का अंडरग्राउंड डॉन विक्रम शर्मा! जिम से निकलते ही हमलावरों ने बरसाईं ताबड़तोड़ गोलियां, खौफनाक अंत से उठे बड़े सवाल
देहरादून। झारखंड के अपराध जगत का वो नाम, जिसे कभी अंडरग्राउंड डॉन कहा जाता था, जो सालों तक पुलिस की आंखों में धूल झोंकता रहा और जिसने जमशेदपुर से लेकर रांची तक खौफ का साम्राज्य खड़ा किया। आखिरकार उसका अंत देहरादून में हो गया। आज शुक्रवार को देहरादून के सिटी सेंटर मॉल के बाहर जिस विक्रम शर्मा की गोली मारकर हत्या की गई, वह कोई साधारण व्यक्ति नहीं बल्कि अपराध की दुनिया का एक बड़ा खिलाड़ी था। वह जिम से बाहर निकल रहा था, तभी अज्ञात हमलावरों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है, लेकिन इस घटना ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। जमशेदपुर के अपराध जगत में विक्रम शर्मा को दिमाग कहा जाता था। वह खुद सामने कम आता था, लेकिन हर बड़ी वारदात के पीछे उसकी रणनीति होती थी। उसका शिष्य था कुख्यात गैंगस्टर अखिलेश सिंह। अपराध की दुनिया में कहा जाता है विक्रम प्लान बनाता था और अखिलेश उसे अंजाम देता था। 2 नवंबर 2007 को साकची आमबागान के पास श्री लेदर्स के मालिक आशीष डे की हत्या ने पूरे शहर को हिला दिया था। इस हत्याकांड में अखिलेश के साथ विक्रम का नाम भी सामने आया। इसके बाद पुलिस की दबिश बढ़ी और विक्रम अंडरग्राउंड हो गया। उसने खुद को पीछे कर अखिलेश को गिरोह का चेहरा बना दिया। 2008 में जमशेदपुर में सीरियल क्राइम की झड़ी लग गई। यही नहीं कई चर्चित घटनाओं में विक्रम और अखिलेश का नाम रहा है। सूत्रों के अनुसार विक्रम को अपनी जान का खतरा था। आज वह खुद भी हथियार लेकर जिम पहुंचा था, लेकिन हमलावरों ने उसे संभलने या जवाबी कार्रवाई करने का एक सेकंड का मौका भी नहीं दिया। शुरूआत जांच में सामने आया है कि 45 वर्षीय विक्रम शर्मा असल में झारखंड के कुख्यात अखिलेश सिंह गैंग का रणनीतिकार और गुरू था। उस पर हत्या के 30 से अधिक मामलों सहित कुल 50 से ज्यादा मुकदमे दर्ज थे।
‘थ्री पी’ को मैनेज करने में माहिर था विक्रम
जानकार बताते हैं कि विक्रम बेहद शांत और मृदुभाषी था। वह ‘थ्री पी’, यानी पुलिस, पॉलिटिशियन और प्रेस को मैनेज करने में माहिर माना जाता था। उसके राजनीतिक गलियारों तक भी संबंध बताए जाते रहे। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि कभी नहीं हो सकी। इसी दौरान पुलिस ने शिकंजा कसना शुरू किया तो विक्रम अचानक गायब हो गया। उसने अपनी पहचान बदल ली और उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में जाकर रहने लगा। बताया जाता है कि वह एक अपार्टमेंट में किराए पर रह रहा था और आलीशान जिंदगी बिता रहा था। उसके पास महंगी गाड़ियां थीं और वह पूरी तरह से लो-प्रोफाइल जीवन जी रहा था।