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मल्लीताल में अबीर-गुलाल की बौछार, रामसेवक प्रांगण से निकला रंगों और परंपरा का उल्लासपूर्ण जुलूस

  • Tapas Vishwas
  • March 02, 2026 11:03 AM
A shower of abir-gulal in Mallital, a joyous procession of colours and tradition started from Ramsevak courtyard.

नैनीताल। सरोवर नगरी नैनीताल का मल्लीताल क्षेत्र होली के रंगों में सराबोर नजर आया। रामसेवक प्रांगण में आयोजित होली जुलूस ने पूरे शहर में उत्सव का माहौल बना दिया। राम सेवक सभा की ओर से निकाले गए पारंपरिक होली जुलूस में अबीर-गुलाल की जमकर बौछार हुई। स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों ने भी इस आयोजन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। जुलूस के दौरान होलियारों की टोली पारंपरिक होली गायकी प्रस्तुत करते हुए आगे बढ़ी। “जो नर जीवे खेले फाग...” जैसे आशीर्वचन गीतों के साथ होलियारों ने नैनीताल सहित देशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की। ढोल-नगाड़ों और झांझ-मंजीरों की धुन पर लोग झूमते-गाते नजर आए। रंगों से सराबोर माहौल में हर कोई एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं देता दिखा।

इस अवसर पर आकर्षक वेशभूषा में सजे बच्चों ने स्वांग परंपरा को जीवंत कर दिया। विभिन्न पौराणिक और सामाजिक पात्रों का रूप धारण किए बच्चों ने जुलूस को खास आकर्षण प्रदान किया। स्थानीय बुजुर्गों का कहना है कि मल्लीताल की यह परंपरा वर्षों पुरानी है, जो आज भी उसी उत्साह और सादगी के साथ निभाई जा रही है। होली जुलूस रामसेवक प्रांगण से शुरू होकर मल्लीताल बाजार, आर्य समाज मार्ग, कमेटी लाइन और जयलाल साह बाजार होते हुए पुनः सभा प्रांगण पहुंचकर संपन्न हुआ। रास्ते भर दुकानदारों और राहगीरों ने भी जुलूस का स्वागत किया और रंगोत्सव में भागीदारी निभाई। होलियारों का कहना है कि वे सादगी, भाईचारे और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ होली मना रहे हैं। उनके अनुसार, होली केवल रंगों का त्योहार नहीं बल्कि आपसी प्रेम, सौहार्द और सामाजिक एकता का प्रतीक है। इस आयोजन ने एक बार फिर साबित किया कि नैनीताल की सांस्कृतिक विरासत आज भी जीवंत है और नई पीढ़ी भी इन परंपराओं को आगे बढ़ाने में उत्साहपूर्वक भाग ले रही है। रंग, संगीत और उल्लास से भरे इस जुलूस ने मल्लीताल को पूरी तरह उत्सवमयी बना दिया और सरोवर नगरी में होली का आनंद चरम पर पहुंच गया।
 


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