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देहरादून के लोक भवन में तीन दिवसीय उत्सव का भव्य समापन,पहली बार दिए गए गवर्नर्स अवार्ड, 161 विजेता सम्मानित

  • Tapas Vishwas
  • March 02, 2026 01:03 PM
The three-day festival concludes with a grand ceremony at Lok Bhawan in Dehradun; Governor's Awards presented for the first time; 161 winners honoured.

देहरादून। राजधानी के लोक भवन में आयोजित तीन दिवसीय पुष्प प्रदर्शनी 'वसंतोत्सव-2026' का रविवार को रंगारंग कार्यक्रमों के साथ भव्य समापन हुआ। इस वर्ष की प्रतिष्ठित चल वैजंती (रनिंग ट्रॉफी) पर आईआईटी रुड़की ने कब्जा जमाया है। संस्थान ने विभिन्न 13 श्रेणियों में प्रथम स्थान प्राप्त कर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की, जबकि ओएनजीसी 04 श्रेणियों में जीत के साथ दूसरे स्थान पर रहा। समापन समारोह के मुख्य अतिथि राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.) और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत किया। इस वर्ष उत्सव में कुल 15 मुख्य श्रेणियों की 54 उप-श्रेणियों में 161 पुरस्कार वितरित किए गए।

वसंतोत्सव-2026 अपनी एक नई पहल के लिए भी याद किया जाएगा। पहली बार 'गवर्नर्स अवार्ड' की शुरुआत की गई, जिसका उद्देश्य राज्य के उन कृषकों को प्रोत्साहित करना है जो स्टार्टअप और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से खेती में क्रांतिकारी बदलाव ला रहे हैं। बागेश्वर के दीपक गडिया (प्रथम), रुद्रप्रयाग के कपिल शर्मा (द्वितीय) और पिथौरागढ़ के शुभम सिंह (तृतीय) रहे। चंपावत की राधा राणा ने प्रथम, अल्मोड़ा की कविता मेहरा ने द्वितीय और पौड़ी की शांति जुयाल ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। टिहरी के देवेंद्र सिंह चौहान को प्रथम, नैनीताल के पंकज मेहता को द्वितीय और हरिद्वार के उज्ज्वल सैनी को तीसरा स्थान मिला। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने अपने संबोधन में बताया कि इन तीन दिनों में लगभग साढ़े तीन लाख लोगों ने लोक भवन पहुंचकर पुष्पों के सौंदर्य का आनंद लिया। उन्होंने कहा, "जनता के चेहरे पर यह प्रसन्नता ही इस आयोजन की असली सफलता है। फूल केवल सुंदरता के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि ये मानसिक स्वास्थ्य, संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा के स्रोत भी हैं।" उन्होंने 'रिप्रिक योगा', दिव्यांग बच्चों की प्रस्तुतियों और महिला स्वयं सहायता समूहों के स्टॉलों की विशेष सराहना करते हुए इन्हें 'विकसित भारत 2047' की दिशा में बढ़ते कदम बताया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्सव को उत्तराखंड की 'ग्रीन इकोनॉमी' का प्रतिबिंब बताया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में राज्य के 656 हेक्टेयर क्षेत्र में व्यावसायिक पुष्प खेती हो रही है। सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए 1200 करोड़ रुपये की लागत से नई सेब, कीवी और ड्रैगन फ्रूट नीतियां लागू की गई हैं। वसंतोत्सव उत्तराखंड की प्राकृतिक संपदा और कृषि शक्ति का उत्सव है। हम समग्र पुष्प नीति और मंडी शुल्क में छूट जैसे माध्यमों से किसानों को 80% तक सब्सिडी प्रदान कर रहे हैं ताकि हमारा प्रदेश आत्मनिर्भर बन सके। समापन समारोह का मुख्य आकर्षण आईएमए (IMA) और आईटीबीपी (ITBP) के पाइप बैंड रहे। उनकी मधुर धुनों ने पूरे वातावरण को देशभक्ति और उत्साह से भर दिया। पुष्प प्रदर्शनी के साथ-साथ रंगोली, पेंटिंग और फोटो प्रतियोगिता के विजेताओं ने भी मंच पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। इस आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया कि उत्तराखंड केवल देवभूमि ही नहीं, बल्कि अब 'पुष्प भूमि' के रूप में भी विश्व पटल पर अपनी पहचान बना रहा है।


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