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सम्मान या अपमान? जयपुर में पत्रकारिता विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में छात्रों की अनदेखी, विरोध के बाद मिली डिग्री, मंच पर संवेदनशीलता पर उठे सवाल

  • Awaaz Desk
  • March 26, 2026 09:03 AM
Honor or disrespect? Students were ignored at the Jaipur University of Journalism's convocation ceremony, awarded degrees after protests, and questions were raised about the sensitivity of the stage.

नई दिल्ली। हरिदेव जोशी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, जयपुर में आयोजित दीक्षांत समारोह उस वक्त विवादों में आ गया, जब भावी पत्रकारों को मंच से सम्मान मिलने की जगह उपेक्षा का सामना करना पड़ा। कार्यक्रम में करीब 275 छात्रों को डिग्री दी जानी थी, लेकिन मंच से केवल लगभग 10 मेडल विजेताओं को ही बुलाया गया, जबकि बाकी छात्र अपने परिवार के साथ नीचे बैठे रह गए। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने पहले ही छात्रों को परिवार सहित आने का निमंत्रण दिया था और पारंपरिक भारतीय परिधान पहनने की अनिवार्यता भी तय की थी। ऐसे में छात्र पूरे उत्साह और तैयारी के साथ पहुंचे थे, लेकिन जब उन्हें मंच से नहीं बुलाया गया, तो यह उनके लिए सम्मान के बजाय निराशा और अपमान का कारण बन गया। छात्रों का साफ कहना था कि अगर सभी को मंच से डिग्री नहीं देनी थी, तो पहले ही इसकी जानकारी दी जानी चाहिए थी।

इसी बीच जब छात्रा सारा इस्माइल को बाद में मंच पर बुलाया गया, तो उन्होंने गुस्से और तंज भरे अंदाज में कहा, “एचजेयू का बेइज्जती करने के बाद इज्जत देने का बहुत-बहुत शुक्रिया।” यह एक वाक्य पूरे बैच की नाराजगी का प्रतीक बन गया। उनका यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे पत्रकारिता के मंच से निकली सबसे सटीक प्रतिक्रिया बता रहे हैं। कार्यक्रम में राज्यपाल Haribhau Bagde और डिप्टी सीएम Prem Chand Bairwa की मौजूदगी रही। लंबे भाषणों के बाद जब समारोह लगभग समाप्त कर दिया गया और छात्रों को मंच से नहीं बुलाया गया, तो गुस्सा फूट पड़ा। वीआईपी मेहमानों के जाने के बाद छात्रों ने जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी, जिसके बाद प्रशासन को अपना फैसला बदलना पड़ा और डिप्टी सीएम को दोबारा मंच पर बुलाकर छात्रों को एक-एक कर डिग्री दी जाने लगी।

हालांकि तब तक मामला सिर्फ डिग्री देने का नहीं रह गया था, बल्कि यह सवाल खड़ा हो चुका था कि क्या सम्मान भी विरोध के बाद ही मिलेगा। यह पूरी घटना एक बड़ी विडंबना को उजागर करती है, जहां पत्रकारिता की पढ़ाई कर रहे छात्रों को ही अपनी बात रखने के लिए विरोध का सहारा लेना पड़ा। मंच पर पत्रकारिता की बातें हुईं, लेकिन उसी मंच से संवाद और संवेदनशीलता गायब नजर आई और शायद यही इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा कटाक्ष बन गया।


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