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उत्तराखंड में आईएफएस अफसरों के तबादले बने 'पहेली'! फिर फाइनल होते-होते रह गई सूची

  • Tapas Vishwas
  • March 26, 2026 10:03 AM
Transfers of IFS Officers in Uttarakhand Become a 'Riddle'! List Fails to Get Finalized Once Again

उत्तराखंड में भारतीय वन सेवा अधिकारियों के तबादले एक बार फिर ‘पहेली’ बन गए हैं। लंबे समय से लंबित ट्रांसफर-पोस्टिंग प्रक्रिया इस बार भी अंतिम चरण में पहुंचकर अटक गई है। सूची फाइनल होने से ठीक पहले प्रक्रिया रुक जाने से न केवल अधिकारियों में असमंजस की स्थिति है, बल्कि वन विभाग के कामकाज पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ रहा है। सिविल सर्विस बोर्ड की सिफारिशों के आधार पर आईएफएस अधिकारियों के तबादले आमतौर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में अंतिम रूप दिए जाते हैं। इस बार भी विभागीय स्तर पर व्यापक चर्चा हुई, प्रस्तावित तबादला सूची तैयार की गई और कई अधिकारियों के नाम शामिल किए गए। मंगलवार शाम को सचिवालय में सिविल सर्विस बोर्ड की बैठक बुलाई गई थी, जिसमें उम्मीद जताई जा रही थी कि लंबित तबादला सूची पर अंतिम मुहर लग जाएगी। लेकिन बैठक में कोई निर्णय नहीं हो सका और सूची फाइनल होने से पहले ही प्रक्रिया एक बार फिर अटक गई। यह पहला मौका नहीं है जब IFS तबादलों की फाइल अंतिम चरण में पहुंचकर रुक गई हो। इससे पहले भी बैठक की तारीख तय होने के बावजूद वह आयोजित नहीं हो सकी थी। अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि अगली बैठक कब होगी और तबादला सूची को अंतिम रूप कब दिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, अगले कुछ दिनों में नई तारीख तय किए जाने की संभावना है। प्रमुख वन संरक्षक रंजन कुमार मिश्रा ने कहा, “अभी सिविल सर्विस बोर्ड की बैठक में निर्णय नहीं हो पाया है। जल्द ही नई तारीख तय होने के बाद इस पर विचार किया जाएगा। 

यह अनिश्चितता वन विभाग के लिए खासतौर पर चिंताजनक है क्योंकि प्रदेश में currently फॉरेस्ट फायर सीजन चल रहा है। यह विभाग के लिए सबसे संवेदनशील समय होता है। कई महत्वपूर्ण पदों पर स्थायी तैनाती न होने के कारण काम अतिरिक्त प्रभार के तहत चलाया जा रहा है। कुछ अधिकारी बिना स्थायी पोस्टिंग के ही लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं। इससे वन संरक्षण, फायर फाइटिंग, वन्यजीव प्रबंधन और अन्य क्षेत्रीय कार्यों पर असर पड़ने की आशंका है। IFS अधिकारियों के बीच भी असमंजस का माहौल है। कई अधिकारी अपनी नई तैनाती का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन बार-बार प्रक्रिया अटकने से उनका मनोबल प्रभावित हो रहा है। सवाल उठ रहा है कि आखिर तबादला प्रक्रिया में इतनी बार देरी क्यों हो रही है? वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि समय पर तबादले नहीं होने से प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित होती है। खासकर फायर सीजन में क्षेत्रीय स्तर पर कुशल अधिकारियों की कमी महसूस की जा रही है। बार-बार टल रही बैठकें IFS तबादलों की प्रक्रिया लंबे समय से लंबित है। विभागीय स्तर पर मंथन तो होता रहा, लेकिन अंतिम निर्णय लेने में बार-बार अड़चन आ रही है। राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर इस मुद्दे को लेकर चर्चा भी हो चुकी है, लेकिन अभी तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है। विशेषज्ञों का मानना है कि वन विभाग जैसे संवेदनशील विभाग में तबादलों की अनिश्चितता लंबे समय तक नहीं चलनी चाहिए। खासकर जब फॉरेस्ट फायर और वन्यजीव संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण कार्य चल रहे हों। समय पर स्थायी तैनाती से न केवल अधिकारियों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि विभागीय कार्यकुशलता भी सुधरेगी। अब सभी की निगाहें अगली सिविल सर्विस बोर्ड बैठक पर टिकी हुई हैं। उम्मीद की जा रही है कि इस बार प्रक्रिया पूरी हो जाएगी और IFS अधिकारियों को उनकी नई जिम्मेदारियों का पता चल सकेगा। यह घटनाक्रम उत्तराखंड प्रशासन में लंबित तबादला प्रक्रियाओं की एक और मिसाल बन गया है, जहां फाइलें अंतिम चरण तक पहुंचने के बावजूद अटक जाती हैं। वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को अब उम्मीद है कि शीघ्र ही इस अनिश्चितता का अंत होगा।


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