आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का इन 24 सीटों पर रहेगा खास फोकस, चुनावी एजेंडे में शामिल होंगे मुद्दे
देहरादून। उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति तैयार करना शुरू कर दिया है। चुनाव भले ही अभी दूर हो, लेकिन सियासी दलों ने अभी से माहौल बनाना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में कांग्रेस ने आगामी चुनाव में राज्य के मध्य हिमालय क्षेत्र को अपने फोकस में रखने के संकेत दिए हैं। यह वह इलाका है जहां 2022 के चुनाव में पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई थी, ऐसे में कांग्रेस अब इन क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाकर चुनावी रणनीति तैयार कर रही है।
दरअसल,उत्तराखंड की राजनीति में पर्वतीय क्षेत्रों की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है। इसी कारण कांग्रेस ने अब उन जिलों पर विशेष ध्यान देने की योजना बनाई है, जो गैरसैंण के आसपास स्थित हैं और जिनका स्थायी राजधानी के मुद्दे से सीधा संबंध माना जाता है। पार्टी के अनुसार मध्य हिमालय क्षेत्र में आने वाले छह जिले अल्मोड़ा, बागेश्वर, पौड़ी गढ़वाल, टिहरी गढ़वाल, चमोली और रुद्रप्रयाग आगामी चुनाव में कांग्रेस की रणनीति का अहम हिस्सा होंगे। यदि विधानसभा सीटों के लिहाज से देखें तो इन छह जिलों में कुल 24 सीटें आती हैं. अल्मोड़ा जिले में छह विधानसभा सीटें हैं, अल्मोड़ा, द्वाराहाट, जागेश्वर, रानीखेत, सल्ट और सोमेश्वर, वहीं बागेश्वर जिले में दो सीटें बागेश्वर और कपकोट शामिल हैं। इसी तरह पौड़ी गढ़वाल जिले में पांच विधानसभा सीटें कोटद्वार, पौड़ी, चौबट्टाखाल, श्रीनगर और यमकेश्वर हैं। इसके अलावा टिहरी गढ़वाल जिले में छह विधानसभा सीटें टिहरी, प्रतापनगर, देवप्रयाग, धनोल्टी, नरेंद्रनगर और घनसाली आती हैं। चमोली जिले में तीन सीटें बदरीनाथ, कर्णप्रयाग और थराली शामिल हैं, जबकि रुद्रप्रयाग जिले में दो सीटें केदारनाथ और रुद्रप्रयाग विधानसभा आती हैं। इस तरह इन छह जिलों की कुल 24 विधानसभा सीटें उत्तराखंड की राजनीति में महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
हालांकि विधानसभा चुनाव 2022 में कांग्रेस का प्रदर्शन इन क्षेत्रों में कमजोर रहा था। इन 24 सीटों में से पार्टी केवल चार सीटें ही जीत पाई थी, इनमें अल्मोड़ा जिले की अल्मोड़ा और द्वाराहाट सीट, टिहरी जिले की प्रतापनगर सीट और चमोली जिले की बदरीनाथ सीट शामिल हैं। बाकी अधिकांश सीटों पर भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की थी। यही वजह है कि कांग्रेस अब इस क्षेत्र को लेकर अपनी रणनीति बदलती नजर आ रही है। पार्टी का मानना है कि यदि इन पर्वतीय जिलों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी तरीके से उठाया जाए तो आगामी चुनाव में बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। खासतौर पर गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने का मुद्दा कांग्रेस के एजेंडे में प्रमुखता से शामिल हैं। कांग्रेस की रणनीति केवल गैरसैंण तक सीमित नहीं है। पार्टी पर्वतीय क्षेत्रों से जुड़े सामाजिक और भावनात्मक मुद्दों को भी चुनावी एजेंडे में शामिल करने की तैयारी कर रही है। इनमें हाल के समय में चर्चित रहे अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े मामले को भी प्रमुख मुद्दा बनाने के संकेत दिए गए हैं। पार्टी का मानना है कि पहाड़ की मूल भावनाओं और स्थानीय मुद्दों को केंद्र में रखकर ही जनता से बेहतर जुड़ाव बनाया जा सकता है। दूसरी ओर इस पूरे मुद्दे पर भाजपा का अलग दृष्टिकोण है। भाजपा का कहना है कि गैरसैंण को लेकर कांग्रेस राजनीति कर रही है,जबकि इस दिशा में ठोस कदम भाजपा सरकार के समय ही उठाए गए थे। भाजपा का दावा है कि गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करने का निर्णय भाजपा सरकार में ही लिया गया था। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले उत्तराखंड की राजनीति में गैरसैंण और पर्वतीय क्षेत्रों से जुड़े मुद्दे एक बार फिर प्रमुखता से सामने आते दिखाई दे रहे हैं। कांग्रेस जहां मध्य हिमालय क्षेत्र की 24 सीटों पर विशेष फोकस करके चुनावी रणनीति बना रही है, वहीं भाजपा भी इन मुद्दों को लेकर कांग्रेस के दावों को चुनौंती दे रही है। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि पर्वतीय जिलों से जुड़े मुद्दे उत्तराखंड की चुनावी राजनीति को किस दिशा में ले जाते हैं।