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उत्तराखंड: जनगणना में घर की दीवार से लेकर खाने के अनाज तक पूछे जाएंगे सवाल, 33 बिंदुओं की अधिसूचना जारी

  • Tapas Vishwas
  • February 20, 2026 10:02 AM
Uttarakhand: Census will ask questions ranging from house walls to food grains, 33-point notification issued

देहरादून। आगामी जनगणना के तहत इस बार मकान गणना के दौरान नागरिकों को अपने घर की बनावट, सुविधाओं और जीवनशैली से जुड़े कुल 33 सवालों का जवाब देना होगा। गृह मंत्रालय ने मकानों की गणना को लेकर विस्तृत अधिसूचना जारी कर दी है। उत्तराखंड में यह मकान गणना 25 अप्रैल से 24 मई के बीच प्रस्तावित है, जिसके लिए तैयारियां तेज कर दी गई हैं। जनगणना निदेशालय के अनुसार, जिलावार प्रशिक्षण 19 से 28 फरवरी के बीच आयोजित किए जाएंगे। इन प्रशिक्षण सत्रों में चार्ज अधिकारी, सहायक चार्ज अधिकारी, तकनीकी सहायक और सेंसस क्लर्क को नई प्रक्रिया और तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी जाएगी। निदेशक जनगणना ईवा आशीष श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया है कि मकान गणना के दौरान जुटाई जाने वाली सभी जानकारियां पूरी तरह गोपनीय रहेंगी और किसी भी स्तर पर साझा नहीं की जाएंगी।

इस बार गणना के दौरान भवन और जनगणना मकान नंबर से लेकर फर्श, दीवार और छत में प्रयुक्त सामग्री तक की जानकारी ली जाएगी। मकान का उपयोग, उसकी स्थिति, स्वामित्व और उसमें रहने वाले परिवारों की संख्या भी दर्ज की जाएगी। परिवार के मुखिया का नाम, लिंग और सामाजिक वर्ग से संबंधित जानकारी भी पूछी जाएगी। इसके अलावा घर में उपलब्ध कमरों की संख्या, विवाहित दंपतियों की संख्या, पेयजल का मुख्य स्रोत और उसकी उपलब्धता, प्रकाश की व्यवस्था, शौचालय और बाथरूम की सुविधा, गंदे पानी की निकासी और रसोईघर की स्थिति जैसे बुनियादी प्रश्न शामिल हैं। खाना पकाने में प्रयुक्त ईंधन और एलपीजी या पीएनजी कनेक्शन की जानकारी भी ली जाएगी। डिजिटल और उपभोक्ता सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। परिवार के पास रेडियो, टेलीविजन, इंटरनेट, लैपटॉप, कंप्यूटर, मोबाइल फोन या स्मार्टफोन की उपलब्धता के बारे में पूछा जाएगा। साथ ही साइकिल, दोपहिया, कार या अन्य वाहनों की जानकारी भी दर्ज की जाएगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि परिवार द्वारा उपभोग किए जाने वाले मुख्य अनाज और संपर्क के लिए मोबाइल नंबर भी दर्ज किया जाएगा, हालांकि मोबाइल नंबर का उपयोग केवल जनगणना संबंधी सूचना के लिए ही होगा। प्रशासन का कहना है कि इन आंकड़ों के आधार पर सरकार भविष्य की योजनाओं और संसाधनों के बेहतर वितरण की रणनीति तैयार कर सकेगी। नागरिकों से अपील की गई है कि वे गणना कर्मियों को सही और सटीक जानकारी उपलब्ध कराएं।
 


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